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जिले में अवैध कॉलोनियों का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब शहर की सीमाएं खेतों को निगल रही हैं। सरकारी रिकॉर्ड खुद गवाही दे रहे हैं कि जिले में 240 अवैध कॉलोनियां अस्तित्व में हैं, लेकिन प्रशासन का चाबुक केवल 55 कॉलोनियों पर ही चला है। शेष 185 कॉलोनियों को मानो प्रशासन ने माफियाओं के हवाले कर दिया है। कार्रवाई की इस कछुआ चाल ने जनता के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यह महज प्रशासनिक सुस्ती है या फिर सफेदपोश माफियाओं के साथ कोई गहरा गठबंधन?
शहर के मास्टर प्लान को ठेंगा दिखाते हुए भू-माफिया अब मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के आसपास सक्रिय हैं। यहां कृषि भूमि का डायवर्जन कराए बिना ही रातों-रात सडक़ें बिछा दी जाती हैं और बिजली के खंभे खड़े कर दिए जाते हैं। तहसील कार्यालय से लेकर राजस्व अमले तक की नाक के नीचे यह खेल जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है।
हैरानी की बात यह है कि जब जिले भर में 240 कॉलोनियां अवैध चिन्हित की गई हैं, तो केवल 23 प्रतिशत (यानी 55) पर ही खरीद-फरोख्त की रोक क्यों लगाई गई? छतरपुर और खजुराहो जैसे क्षेत्रों में माफिया सबसे ज्यादा सक्रिय हैं, जहां क्रमश: 85 और 81 अवैध कॉलोनियां हैं। जानकारों का कहना है कि प्रशासन अगर चाहे तो खसरे के कॉलम नंबर 12 में प्रतिबंध की कैफियत दर्ज कर इनकी बिक्री पर तत्काल रोक लगा सकता है। कानूनन एसडीएम को यह अधिकार है कि वह अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए, लेकिन धरातल पर ऐसी सख्त कार्रवाई बिरले ही देखने को मिलती है।
नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 के तहत किसी भी कॉलोनी में 10 प्रतिशत ओपन एरिया (पार्क और उद्यान) छोडऩा अनिवार्य है। लेकिन इन अवैध कॉलोनियों में माफिया इंच-इंच जमीन बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। सरकारी जमीन, तालाब की मेढ़ और सार्वजनिक पार्कों पर अतिक्रमण कर बनाई गई इन कॉलोनियों को भविष्य में वैध करना भी असंभव होगा, जिसका खामियाजा उन आम लोगों को भुगतना पड़ेगा जो अपनी गाढ़ी कमाई इन प्लॉटों में लगा रहे हैं।
प्रशासन द्वारा चिन्हित अवैध कॉलोनियों की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
- बिजावर- 26 कॉलोनियां
- नौगांव व राजनगर- 16-16 कॉलोनियां
- लवकुशनगर व हरपालपुर- 08-08 कॉलोनियां
- कुल योग- 240 कॉलोनियां
जब इस गंभीर मुद्दे पर एसडीएम प्रशांत अग्रवाल से बात की गई, तो उनका कहना था कि शहरी क्षेत्रों की अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है, लेकिन सवाल वही है कि आखिर माफियाओं को इतना समय क्यों दिया जा रहा है कि वे अपनी सारी प्लॉटिंग बेचकर रफूचक्कर हो जाएं?
Updated on:
29 Apr 2026 10:25 am
Published on:
29 Apr 2026 10:24 am
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