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Rare Crow: छत्तीसगढ़ में मिला दुर्लभ सफेद कौवा, आप भी देखें, विशेषज्ञों का है ये कहना

Rare White Crow: किसी से भी आप पूछेंगे कि कौवा (Crow) किस रंग का होता है तो वह स्वाभाविक रूप से यही जवाब देगा कि काले रंग का, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र (Naxal Effected Area) में करीब एक साल से सफेद रंग का एक कौवा घूम रहा है, यह आम कौवों के साथ ही रहता है

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White crow

Rare White crow

अंबिकापुर. Rare White Crow: कौवा काले रंग का होता है, यह हम किताबों में शुरु से पढ़ते आ रहे हैं। हम अब तक अपने आस-पास भी काले रंग के कौवे ही देखते आ रहे हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ केे नक्सल प्रभावित इलाके जगदलपुर (Jadalpur) में एक दुर्लभ कौवा देखा गया है, उसका रंग सफेद है। बताया जा रहा है यह कौवा करीब एक साल से क्षेत्र में घूम रहा है। यह दुर्लभ कौवा आम कौवों के साथ ही रहता है। कौवे की क्षेत्र में उपस्थिति पर जीव विज्ञानी भी नजर रखे हुए हैं। इस कौवे पर लगातार शोध (Research) के बाद अंतरराष्ट्रीय साइंस जनरल एंबिएंट साइंस में इसका विवरण भी प्रकाशित किया गया। बताया जा रहा है कि जगदलपुर का यह क्षेत्र उक्त कौवे के रहने के अनुकूल है।


गौरतलब है कि दुर्लभ सफेद कौवा (White crow) जगदलपुर जिले के दलपत सागर से लगे धरमपुरा इलाके में करीब एक साल से घूम रहा है। जीव विज्ञानियों का कहना है कि यह इलाका इसके रहने के अनुकूल है, क्योंकि यह क्षेत्र बड़े पेड़ों से आच्छादित है तथा यहां कच्चे व पक्के मकान भी हैं। पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्लभ सफेद कौवे देश के अन्य हिस्से में भी मिल चुके हैं, संभवत: यह छत्तीसगढ़ का पहला मामला है।

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जीव विज्ञानियों का यह कहना
दुर्लभ सफेद कौवे (Rare White Crow) के रंग को लेकर जीव विज्ञान विशेषज्ञ का कहना है कि ल्यूसिस्टिक का मतलब रंग कणिकाओं का कम होना होता है। कौवे के पंख व चमड़ी में मिलेनिन कणिकाएं कम हो जाती हैं इस कारण ये सफेद दिखते हैं।

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आवाज में भिन्नता, अध्ययन की जरूरत
कौवे की आवाज कर्कश होती है। सफेद कौवे को लेकर पक्षी विज्ञानियों का कहना है कि इस कौवे की आवाज में भी थोड़ी भिन्नता महसूस की जाती है लेकिन रिकॉर्डिंग करने वाले यंत्र से इसके अध्ययन की जरूरत है।

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