
Patient in hospital
अंबिकापुर. मौसम के बदलते तेवर का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी पडऩे लगा है। इसका सबसे अधिक प्रभाव केंद्रीय जेल में बंद बंदियों पर दिखाई पड़ रहा है। पिछले तीन दिनों के दौरान जेल में 16 से अधिक बंदी डायरिया से पीडि़त हैं, जिन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं।
दुष्कर्म की सजा काट रहे एक बंदी की मौत हो गई। वहीं 3 की गंभीर स्थिति को देखते हुए रायपुर रेफर कर दिया गया। इधर शहर सहित आसपास के क्षेत्र से मेडिकल कॉलेज में अब तक डायरिया से पीडि़त होकर 54 लोग पहुंच चुके हैं।
मौसम के बदलते तेवर का सबसे अधिक असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित निजी चिकित्सालयों में इन दिनों सबसे अधिक उल्टी-दस्त से पीडि़त होकर लोग पहुंच रहे हैं। मौसम का सबसे अधिक असर केंद्रीय जेल में नजर आ रहा है, जहां क्षमता से अधिक बंदी है।
पिछले तीन दिनों के दौरान 16 बंदी उल्टी-दस्त से पीडि़त होकर गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही शहर सहित आसपास के क्षेत्र से उल्टी-दस्त से पीडि़त होकर लगभग 54 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। क्षमता से अधिक लोगों के उल्टी-दस्त से पीडि़त होकर अस्पताल पहुंचने की वजह से अब आइसोलेशन वार्ड के बिस्तर भी खाली नहीं बचे हैं। इसकी वजह से मरीजों को बरामदे में रखकर इलाज किया जा रहा है।
केंद्रीय जेल के अस्पताल में क्षमता से अधिक बंदियों के भर्ती होने की वजह से अब वहां भी जगह खाली नहीं है। इससे वहां से मरीजों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।
बंदी की हुई मौत
केंद्रीय जेल में जशपुर जिले के ग्राम बटईकेला के टोंगरीटोला निवासी 27 वर्षीय पालन लोहार पिता साधु लोहार को जशपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय द्वारा धारा 363, 366क, 376 व लैगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास के सजा से दंडित किया गया था। उल्टी-दस्त से पीडि़त होने पर केंद्रीय जेल से उसे मंगलवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां बुधवार की सुबह 9.40 बजे उसकी मौत हो गई।
तीन घंटे बाद दी गई पुलिस को सूचना
अस्पताल परिसर में ही पुलिस सहायता केंद्र हैं। बंदी की मौत सुबह 9.40 बजे हो गई थी लेकिन इसकी जानकारी अस्पताल चौकी में कर्मचारियों द्वारा लगभग 1 बजे के आसपास दी गई। जबकि बंदी के मौत पर कई महत्वपूर्ण कारवाई पीएम के पूर्व की जाती है। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने 20 मिनट का सफर पूरा करने में लगभग 3 घंटे का समय लगा दिया।
एक चिकित्सक के भरोसे केंद्रीय जेल
जेल में इन दिनों सबसे अधिक डायरिया से बंदी परेशान हैं। केंद्रीय जेल में 40 बिस्तर का अस्पताल है। जेल में लगभग 2500 महिला-पुरूष बंदी बंद हैं, जो क्षमता से दोगुना हैं। यहां एक मात्र महिला चिकित्सक की पदस्थापना अस्पताल प्रबंधन द्वारा की गई है। महिला चिकित्सक होने की वजह से पुरूष बंदी का पूरी तरह से इलाज हो नहीं पाता है।
60 से अधिक जेल अस्पताल में हैं भर्ती
केंद्रीय जेल में 40 बिस्तर का अस्पताल है लेकिन यहां इन दिनों उल्टी-दस्त से लगभग 60 से अधिक मरीज भर्ती हैं। महिला चिकित्सक द्वारा इनका सही इलाज नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है।
क्षमता से काफी अधिक हैं बंदी
जेल में ढाई हजार से अधिक बंदी बंद हैं, जो क्षमता से काफी अधिक है। महिला चिकित्सक होने की वजह से पुरुष बंदियों का इलाज करने में उन्हें थोड़ी परेशानी होती है। विशेष निवेदन पर बुधवार को सीएमएचओ द्वारा एक डॉक्टर को भेजा गया था। बंदियों को ध्यान में रखते हुए अधिक डॉक्टरों की आवश्यकता है।
राजेन्द्र गायकवाड, जेल अधीक्षक
Published on:
16 May 2018 09:44 pm
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