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कुलसचिव ने राज्यपाल को लिखा पत्र, बोले- कुलपति मुझे कर रहे प्रताडि़त, मंच से हटाई गई थी कुर्सी

Registrar and Vice Chancellor dispute: संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय के कुलसचिव व कुलपति के बीच चल रहा आपसी विवाद फिर आया सामने, कुलसचिव ने कुलपति पर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का भी लगाया आरोप

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Registrar and Vice chancellor dispute

Registrar wrote a letter to The Governor

अंबिकापुर. Registrar and Vice Chancellor dispute: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा में एक बार फिर आपसी विवाद गहराता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद एक्का ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कुलपति द्वारा मानसिक रूप से प्रताडि़त करने व सार्वजनिक अपमान करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि विवि द्वारा 29 व 30 अप्रैल को शहर के एक होटल में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में आयोजन किया गया था। इसमें कुलसचिव की कुर्सी मंच से हटवा दी गई थी। इस दौरान कुलसचिव कार्यक्रम छोडक़र चले गए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपमानित महसूस हुआ।


राज्यपाल को प्रेषित पत्र में कुलसचिव ने लिखा है कि जब से वर्तमान कुलपति ने पदभार ग्रहण किया है, तब से मैं अपने कुलसचिव के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहा हूं। विश्वविद्यालय अधिनियम, विनियम एवं परिनियम में कुलपति एवं कुलसचिव के अधिकार स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं।

परंतु कुलपति द्वारा अकादमिक एवं प्रशासनिक बैठकों में मुझे दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा 29 एवं 30 अपै्रल को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें कुलसचिव को पूर्णरूप से नजरअंदाज किया गया।

सम्मेलन की कार्ययोजना में कुलसचिव को पूर्णरूपेण पृथक किया गया। कुलसचिव के पास सिर्फ नस्तियां ही भेजी जाती रहीं हैं। सम्मेलन में भाग लेने के लिए न तो कुलसचिव को और न ही अन्य अधिकारियों को आमंत्रित किया गया।

इससे पूर्व मेरे द्वारा भी कार्यक्रम के आयोजन हेतु कुलसचिव के रूप में उत्तरदायित्वों एवं भूमिका के बारे में नोटशीट पर कुलपति से निर्देश मांगा गया था परन्तु इसमें मुझे कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ। सहमति मिलने पर मैं 29 अपै्रल को निर्धारित समय से पूर्व कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित हो गया था।


मेरी नाम पट्टिका की कुर्सी हटा दी गई
कुलसचिव ने पत्र में लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस कार्यक्रम में मंच में 5 सदस्यों को मंचासीन होना था। इनमें से एक जगह कुलसचिव के लिए रखा गया था। उद्घोषक द्वारा समस्त मंचासीन होने वाले अतिथियों का नाम बारी-बारी से पुकारा जाने लगा था। इसी बीच कार्यक्रम स्थल पर कुलपति का आगमन हुआ।

उद्घोषक द्वारा पुन: अतिथियों को मंचासीन होने के लिए निवेदन किया जा रहा था जिसमें कुलसचिव का भी नाम था। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों की उपस्थिति थी, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति थी एवं विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक भी उपस्थित थे तथा अन्य अतिथि भी अपनी उपस्थिति दे चुके थे।

इस वक्त मैं, कुलपति एवं अतिथिगण सामने सोफा पर बैठे थे। उद्घोषक द्वारा अतिथियों के नाम पुकारे जा रहे थे उसी वक्त मंच से मेरा नाम पट्टिका एवं कुर्सी हटाया गया। यह देखकर कि विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में जब कुलसचिव (Registrar) की गरिमा का इस तरह से अपमान किया गया, ऐसी स्थिति में मैंने कार्यक्रम स्थल से बाहर जाना ही उचित समझा।

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अपमानित महसूस कर रहा हूं
कुलसचिव ने लिखा है कि कुलपति के इस व्यवहार से अत्यन्त ही अपमानित महसूस कर रहा हूं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव होने के नाते एवं विश्वविद्यालय की व्यवस्था के तहत एवं विश्वविद्यालय के कस्टोडियन अधिकारी के साथ इस तरह से व्यवहार और वो भी आम जनता के समक्ष कुलसचिव का अपमान करना विश्वविद्यालय का अपमान करना है।

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‘पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं कुलपति’
कुलसचिव विनोद एक्का ने राज्यपाल को लिखे पत्र में अवगत कराया है कि कुलपति द्वारा मुझसे इस प्रकार से किए जा रहे व्यवहार से ऐसा लगता है कि कुलपति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। चूंकि मैं एक अनुसूचित जनजाति वर्ग का अधिकारी हूं एवं उनके अधीनस्थ अनुसूचित जनजाति वर्ग का अधिकारी काम न करे, यही उनकी मंशा है।

जब से कुलपति पदभार ग्रहण किए हैं, इसके कुछ दिनों के बाद ही कुलसचिव के स्थानान्तरण करने के लिए राजभवन को पत्र लिखना इसी बात को इंगित करता है।

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राज्यपाल व सीएम को मामले से कराऊंगा अवगत
मैं अभी बाहर हूं। वापस आकर मैं कुलसचिव को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराउंगा।
अशोक सिंह, कुलपति, संत गहिरा गुरु विवि

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