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‘सरगुजा अंचल के प्राचीन धरोहरों व सरगुजिहा लोकगीतों में व्याप्त हैं राम’

मेघदूतम की रचना स्थली रामगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में जिला पुरातत्व संघ सूरजपुर के सदस्य अजय कुमार चतुर्वेदी ने सरगुजा में राम: मूर्त और अमूर्त स्वरूप शोध की प्रस्तुति कर बताया कि सरगुजा अंचल के प्राचीन धरोहरों और सरगुजिहा लोकगीतों में राम व्याप्त हैं। उन्होंने सरगुजा संभाग के पांचों जिले सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज एवं जशपुर में गहन शोध कर 38 स्थलों का चिन्हांकन किया है, जहां-जहां भगवान राम गए थे।

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‘सरगुजा अंचल के प्राचीन धरोहरों व सरगुजिहा लोकगीतों में व्याप्त हैं राम’

अंबिकापुर। मेघदूतम की रचना स्थली रामगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में जिला पुरातत्व संघ सूरजपुर के सदस्य अजय कुमार चतुर्वेदी ने सरगुजा में राम: मूर्त और अमूर्त स्वरूप शोध की प्रस्तुति कर बताया कि सरगुजा अंचल के प्राचीन धरोहरों और सरगुजिहा लोकगीतों में राम व्याप्त हैं। उन्होंने सरगुजा संभाग के पांचों जिले सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज एवं जशपुर में गहन शोध कर 38 स्थलों का चिन्हांकन किया है, जहां-जहां भगवान राम गए थे।


ऐसी मान्यता है कि राजा दशरथ के बड़े पुत्र राम, लक्ष्मण और सीता ने वनवास काल की एक लंबी अवधि दंडकारण्य छत्तीसगढ़ में व्यतीत की। प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ को अनेक नामों से जाना जाता था। रामायण काल त्रेता युगद्ध में दक्षिण कोसल और दंडकारण्य कहा जाता था।

अजय चतुर्वेदी ने अपने शोध में बताया कि भगवान राम के वनवास काल का छत्तीसगढ में पहला पड़ाव उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के कोरिया जिले के भरतपुर तहसील के सीतामढ़ी हरचौका को से हुआ था। कोरिया जिले के घाघरा सरतामढ़ी, सिद्ध बाबा का आश्रम सीतामढ़ी, गांगी रानी, रामगढ़ अमृतधारा, कोटाडोल, सीतामढ़ी छतौड़ा आश्रम, देवसील, अमृतधारा, जटाशंकरी गुफा और देवगढ़ श्रीराम कथा से संबंधित प्रमुख प्राचीन स्थल हैं।

सूरजपुर जिले का कुदरगढ़ जोगीमाड़ा गुफा चपदा ग्राम, लक्ष्मण पंजा, सीता लेखनी पहाड़, रक्सगंडा, राम लक्ष्मण पंजा सारासोर, श्रीराम लक्ष्मण पखना ग्राम पासल भैयाथान, मरह_ा, साल्हो और बेसाही पहाड़ पोड़ी, शिवपुर का सीता पांव, बिलद्वार गुफा और सरगुजा जिले का यमदग्नि ऋषि की तपोभूमि देवगढ़ और सतमहला, महेशपुर, रामगढ़, लक्ष्मणगढ़, मिरगा डांड, चंदन मिट्टी गुफा, नान दमाली एवं बड़े दमाली के समीप बंदरकोट, अंजनी टीला, मैनपाट सरभंजा, देउरपुर, सीतापुर में मंगरैलगढ़ एव जशपुर जिले के पत्थगांव तहसील का किलकिला आश्रम, बगीचा शिव मंदिर, रिंगार घाट, लेखा पत्थर, लक्ष्मण पंजा आदि स्थल हैं।


इसलिए विश्रामपुर पड़ा था नाम
चतुर्वेदी ने बताया कि पहले अंबिकापुर को विश्रामपुर कहा जाता था। छत्तीसगढ़ नए सूबा में सरगुजा के शामिल होने के साथ ही विश्रामपुर का नाम अंबिकापुर अंबिका देवी के नाम पर रखा गया। विश्रामपुर नामकरण के संबंध में जनश्रुति है कि रामायण काल में वनवास के समय भगावान राम, सीता एवं लक्ष्मण दंडकारण्य से गुजरते वक्त वर्तमान अंबिकापुर में कुछ समय विश्राम किए थे, इसलिए विश्रामपुर नाम पड़ा था।


पारंपरिक लोक लोकगीतों में राम कथा का भंडार
सरगुजा अंचल में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के वन गमन की कहानी यहां के पर्वतों, गुफाओं, नदियों और पत्थरों में देखने और सुनने को जितना मिलता है, कहीं उससे ज्यादा सरगुजा अंचल के पारंपरिक सरगुजिहा लोकगीतों, जनजातीय लोक गीतों में सुनने को मिलता है। यहां की जनजातियां भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को आलंबन बनाकर पारंपरिक सरगुजिहा लोकगीतों का गायन करते हैैं। सरगुजा अंचल की जनजातियां अपनी जातीय बोली कुडूख, कोरवाई, पंडो, और कोड़ाकु में भी रामकथा के विभिन्न प्रसंग का गायन करते हैं। इनके लोक गीतों में राम जन्म से लेकर धनुष यज्ञ, विवाह, वन गमन, सीता हरण, सीता की खोज, राम-रावण युद्ध, वन वापसी और राज्याभिषेक तक के सभी प्रसंग सुनने को मिलते हैं।


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