
Speed Governor
अंबिकापुर. Speed Governor: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आदेश पर आरटीओ कार्यालय में आने वाले कॉमर्शियल वाहनों में गति नियंत्रण उपकरण (स्पीड गवर्नर) लगाने का काम जोरों पर है। बिना स्पीड गवर्नर के कॉमर्शियल वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा है। लेकिन आधी-अधूरी तैयारी के साथ वाहनों में स्पीड गवर्नर के नाम पर फिटनेस जारी करने को लेकर आरटीओ में अवैध वसूली जोरों पर है। 1500 से 2500 रुपए कीमत वाले उपकरण के खुलेआम 5 हजार से 6 हजार रुपए एजेंट वसूल रहे हैं। पांच से छह हजार रुपये उन वाहन स्वामियों से लिए जा रहे हैं जिनके वाहनों में ये उपकरण नहीं लगे हैं। इसके बावजूद भी इनके वाहनों में उपकरण नहीं लगाए जा रहे हैं। इतने रुपए खर्च करने के बाद केवल आवेदन व प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है ।
एजेंट द्वारा आरटीओ अधिकारी को प्रति वाहन पर 1 हजार रुपए देकर बड़ी आसानी से फिटनेस जारी करा दिया जा रहा है। स्पीड गवर्नर लगाने के लिए मैकेनिक की आवश्यकता होती है और उसे लगाने में एक घंटे से ज्यादा का समय लगता है।
शासन के सारे नियम ताक पर
फिटनेस के लिए आने वाले वाहन में लगे स्पीड गवर्नर (Speed governor) की पूरी जानकारी परिवहन विभाग के कर्मचारी को स्कैन करनी होगी। मशीन से स्कैन होने के बाद जानकारी सर्वर में लोड करनी पड़ेगी। साथ ही उत्पादक व डीलर, वाहन क्रमांक, गवर्नर की टेस्ट रिपोर्ट व उसे वाहन में लगाने की तारीख भी सर्वर में लोड करनी होगी।
जबकि आरटीओ सरगुजा द्वारा इन सारे नियमों को ताक पर रखकर एजेंट से रुपए लेकर पांच मिनट के अंदर फिटनेस जारी कर दिया जाता है और वाहन सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। अगर ऐसे वाहनों से दुर्घटना होती है तो आरटीओ सरगुजा को क्या मतलब है, उन्हें तो बस अवैध कमाई करनी है।
ये हैं स्पीड गवर्नर के नियम
1. उत्पादक को रखना पड़ेगा स्पीड गवर्नर का रेकॉर्ड।
2. स्पीड गवर्नर उत्पादक को डाटा सेंटर बनाना होगा।
3. यहां हर स्पीड गवर्नर का डाटा सेव करना पड़ेगा।
4. गाड़ी नंबर, स्पीड गवर्नर का मॉडल नंबर भी सेव करना होगा।
5. वाहन में स्पीड गवर्नर लगाने के बाद रोटो सील से सील करना होगा। अगर इससे छेड़छाड़ होती है तो स्पीड गवर्नर किसी काम का नहीं रहेगा।
6. स्पीड गवर्नर के ऊपर उसकी टेस्ट रिपोर्ट, मॉडल नंबर व वाहन का नंबर लिखना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का यह है कहना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्पीड गवर्नर लगे वाहनों की दुर्घटना होती है तो उसकी जांच स्पीड गवर्नर से की जा सकती है कि गाड़ी की स्पीड क्या थी। अगर स्पीड गाइड लाइन से ज्यादा होने पर स्पीड गवर्नर विक्रेता व आरटीओ के अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
Published on:
06 Dec 2021 12:26 am

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