
Sumitra with MSSVP Director Meera Shukla
अंबिकापुर. एमएसएसवीपी स्वधार गृह में कुक के पद पर पदस्थ सुमित्रा (Sumitra) बरगाह जीवन की कड़वी यादों व बेहिसाब प्रताडऩा से जंग लडक़र आज परिवार और समाज के लिए प्रेरणास्रोत (Source of motivation) बन गई है। आत्महत्या तक के विचार से निकलकर पुरूष प्रधान समाज में वह अपनी अलग पहचान बना रही है।
परिवार व समाज (Family and society) का सहारा बनना ही सुमित्रा का उद्देश्य है। हौसला और दृढ़ इच्छाशक्ति से ही वह अपने बिखरते परिवार के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गई।
सरगुजा जिले के दूरस्थ उदयपुर थाना क्षेत्र के ग्राम केदमा निवासी सुमित्रा बरगाह की कहानी (Story) दुख भरी है। माता-पिता ने उसकी शादी 15 वर्ष की उम्र में कोरिया जिले के ग्राम पहाड़ कोरजा निवासी जीतू बरगाह से करा दी थी, जो पहले से ही शादी.शुदा था। खेल-कूद व पढ़ाई (Reading) की उम्र में सुमित्रा का शारीरिक व मानसिक शोषण होना शुरू हो गया।
पति (Husband) द्वारा मारपीट किया जाने लगा। जुल्म इतना बढ़ गया कि पति ने उस पर टांगी से जानलेवा हमला कर दिया। इसके बाद वह जख्मी हालत में अपने मायके पहुंची। यहां कुछ दिन रहने के बाद माता-पिता ने समझाइश देकर पुन: वापस भेज दिया। इस दौरान उसकी छोटी बहन को भी साथ भेज दिया गया।
वहां जाने के बाद पुन: उसे प्रताडि़त किया जाने लगा। पति उसकी छोटी बहन को रखने को तैयार हो गया। सुमित्रा अत्याचार होता देख अपनी बहन के साथ वहां से जंगल के रास्ते से भाग गई।
सात दिन लगातार काफी कष्ट झेला
सुमित्रा (Sumitra) पढ़ी-लिखी नहीं थी। वह मारपीट की डर से ससुराल से तो भाग गई पर उसके पास घर जाने के लिए पैसे नहीं थे। इस कारण वह जंगल के रास्ते से घर जाने के लिए निकली, जबकि उसे घर का रास्ता भी पता नहीं था। सिर्फ उसे मालूम था कि मेरा मायके पूर्व दिशा की ओर है।
सुमित्रा अपनी छोटी बहन के साथ पूर्व दिशा की ओर चलती गई। सूर्यास्त होने पर दोनों बहनें जंगल में ही पेड़ के ऊपर बैठकर रात गुजारतीं थीं। ताकि जंगली जानवर हमला न कर दें। सूर्योदय होने पर पुन: पूर्व दिशा की ओर चलना शुरू कर देतीं थी। इस तरह सात दिन में दोनों बहनें उदयपुर के ग्राम केदमा अपने घर पहुंचीं थी।
आत्महत्या (Suicide) करने का आ गया था विचार
सुमित्रा बरगाह (Sumitra Bargah) कुछ दिनों तक मायके में रही। यहां भी विवाद शुरू हो गया। परिवार वाले दूसरी शादी करने के लिए दबाव बनने लगे। सुमित्रा शादी करना नहीं चाहती थी।
घर व परिवार के ताने से तंग आकर उसने आत्महत्या (Suicide) करने का विचार बना लिया। वह जान देने के उद्देश्य से रेण नदी पहुंच गई थी, लेकिन अचानक यह विचार उसके मन से निकल गया। जीवन की विषम परिस्थितियों के बीच ही एमएसएसवीपी संस्था की एक महिला से मुलाकात हुई और उसे अंबिकापुर ले लाई।
स्वधार गृह में रहकर किया 8वीं पास
सुमित्रा पढ़ी-लिखी नहीं थी। वह स्वधार गृह में रहकर साक्षर बनी और 8वीं पास की। इसके बाद उसे एमएसएसवीपी स्वधार गृह की संचालिका मीरा शुक्ला (Meera Shukla) द्वारा कुक के पद पर पदस्थ कर दिया गया। मीरा शुक्ला ने बताया कि जब वह स्वधार गृह आई थी तो काफी डरी हुई थी।
मीरा शुक्ला ने मां की तरह उसे कई रात अपने पास सुलाया ताकि उसके मन से डर हट सके। आज सुमित्रा समूह की महिलाओं व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पापड़, चिप्स, अगरबत्ती, मोमबत्ती बनाने की ट्रेनिंग भी देती है और गांव के लोगों को अपने बच्चों को स्कूल भेज कर पढ़ानेे के लिए प्रेरित करती है।
शराबी पिता की गिरवी रखी जमीन को मुक्त कराया
सुमित्रा अपने परिवार के लिए एक कमाऊ पुत्र की तरह काम कर रही है। शराबी पिता ने २ एकड़ जमीन किसी दूसरे के हाथों गिरवी रख दी थी। सुमित्रा ने अपनी इच्छाशक्ति से गिरवी रखी जमीन को मुक्त कराया और अपने ५ भाई-बहनों की शादी कराकर घर बसा दिया। शराब के अत्यधिक सेवन के कारण पिता की मौत हो चुकी है।
Published on:
06 Nov 2020 04:56 pm
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