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संयुक्त राष्ट्र। ईरान में हुए परमाणु समझौते से अमरीका के पीछे हटने को लेकर वैश्विक राजनीति में जबर्दस्त बवाल मचा था। इसी बीच अब संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अनुरोध किया कि वे ईरान समझौते से पीछे ना हटें। उन्होंने कहा कि यदि 2015 में हुए इस समझौते को संरक्षित नहीं रखा गया तो युद्ध का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
ईरान समझौते के आलोचक हैं ट्रंप
अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ईरान समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं। इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था। अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वह 12 मई तक फैसला करेंगे कि इस समझौते से अमेरिका जुड़ा रहेगा या नहीं। गुटेरेस ने ईरान समझौते को एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत बताकर इसे बरकरार रखने की बात कही थी।
झूठ के पुलिंदों पर बना था परमाणु समझौताः अमरीका
गुटेरेस ने कहा, 'हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता। हम खतरनाक दौर में हैं। इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ओबामा के समय में हुआ परमाणु समझौता झूठ के पुलिंदों पर बना था।
गुटेरेस से सहमत हैं फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी
फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी सहमत हैं कि ईरान के साथ मौजूदा परमाणु समझौता उसे परमाणु हथियार तैयार करने से रोकने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। गौरतलब है कि ईरान ने 2015 में अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अपने परमाणु कार्यक्रम रोकने को तैयार हो गया था।
Published on:
03 May 2018 01:00 pm
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