
Richard Thaler
स्वीडन। वर्ष 2017 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अमरीकी अर्थशास्त्री रिचर्ड एच थॉलर को दिया जाएगा। थॉलर को यह सम्मान व्यावहारिक अर्थशास्त्र में उनके योगदान के लिए दिया जाएगा। नोबेल कमेटी के मुताबिक, थॉलर ने मनोविज्ञान को अर्थशास्त्र से बेहतरीन तालमेल बिठाया है। कुल मिलाकर उन्होंने यह सिद्धांत विकसित किया है कि लोग अपनी जिंदगी को संवारने के लिए किस तरह से मानसिक तौर पर अपने वित्तीय फैसले सूझबूझ के साथ लेते हैं। इससे लोगों को न सिर्फ सही कदम उठाने में मदद मिलती है, बल्कि वे सामाजिक फायदे भी उठा लेते हैं। बीते साल ओलिवर हार्ट और बेंगेट हॉलस्ट्रॉम को अर्थशास्त्र का नोबेल दिया गया था। उन्हें करीब सात करोड़ की राशि मिलेगी।
रोचेस्टर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर
1945 में न्यू जर्सी में जन्मे 72 वर्षीय रिचर्ड एच थॉलर रोचेस्टर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
इन तीन सिद्धांतों पर खरे उतरे थॉलर
थॉलर ने व्यावहारिक अर्थशास्त्र के तीन सिद्धांत भी दिए। ये हें सीमित तार्किकता, सामाजिक सहूलियतें और आत्मनियंत्रण का अभाव। उनका कहना है कि ये तीनों बातें इंसान के फैसले लेने और बाजार पर उसके प्रभाव को दर्शाती हैं।
राजन भी थे दौड़ में
सोमवार को घोषित हुए अर्थशास्त्र के नोबेल की दौड़ में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी थे। एनालिटिक्स एकैडमिक और साइंटिफिक रिसर्च कंपनी क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स ने नोबेल पुरस्कार के संभावित विजेताओं की एक लिस्ट तैयार की थी, जिसमें रघुराम राजन को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया था।
नोटबंदी की आलोचना कर चुके हैं राजन
रघुराम राजन को आरबीआई के गवर्नर के रूप में दूसरा टर्म मिलने की उम्मीद थी। हालांकि राजन अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद बतौर फैकल्टी शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ बिजनस में वापस चले गए थे। राजन ने बाद में खुलासा किया था कि कई मुद्दों पर उनकी और केंद्र सरकार की राय में फर्क था। इसमें एक नोटबंदी का फैसला भी था, जिसकी उन्होंने कड़ी आलोचना की थी
Updated on:
09 Oct 2017 04:15 pm
Published on:
09 Oct 2017 04:10 pm
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