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मोरमन झींगुरों की फौज का कब्जा.. गलियां-रास्ते बंद, लोग डरकर घरों में दुबके

बारिश जैसा शोर : आपातकालीन सेवाओं पर भी बुरा असर, सड़कों पर चलना दूभर

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मोरमन झींगुरों की फौज का कब्जा.. गलियां-रास्ते बंद, लोग डरकर घरों में दुबके

मोरमन झींगुरों की फौज का कब्जा.. गलियां-रास्ते बंद, लोग डरकर घरों में दुबके

कार्सन सिटी. अमरीका के नेवादा राज्य के कई शहरों पर मोरमन झींगुरों की फौज ने कब्जा कर लिया है। क्या गलियां, क्या सड़क और क्या अस्पताल या घर, कोई ऐसी जगह नहीं बची है, जहां इन आक्रमणकारियों ने पैर नहीं पसारे हों। इनसे बचने के लिए लोग घरों में छिपकर बैठे हैं। लाखों की तादाद में मोरमोन झींगुरों ने एल्को शहर को पूरी तरह ढक लिया है। लोगों का सड़कों पर चलना दूभर हो गया है। अस्पताल जाने वाले रास्ते भी इनकी वजह से बंद पड़े हैं। इनकी आवाज इस तरह शोर पैदा कर रही है, मानो तेज बारिश हो रही हो। झींगुरों की वजह से आपातकालीन सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है।लोग अस्पतालों में मरीजों को लाने से पहले पत्ते हटाने वाले ब्लोअर या झाड़ू का इस्तेमाल कर रहे हैं। कहीं बर्फ हटाने वाली मशीन और ट्रैक्टर की मदद से झींगुरों का ढेर साफ किया जा रहा है। मोरमन झींगुर जमीन पर रहने वाले कीट हैं, जो उड़ नहीं सकते। ये मूल रूप से पश्चिम अमरीका में पाए जाते हैं। इनका भोजन बारामासी झाड़, घास और फसलें हैं। इनकी वजह से पशुओं के चारे में कमी हो जाती है।

खेती, इको सिस्टम को बड़ा नुकसान

मोरमन झींगुर की बड़ी मात्रा मिट्टी के कटाव के साथ मिट्टी और पानी की गुणवत्ता में कमी का कारण बनती है। खेती और इको सिस्टम को बड़ा नुकसान पहुंचता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2006 में नेवादा में करीब एक करोड़ एकड़ जमीन मोरमन झींगुर से पीडि़त थी।

सूखा और आबादी बढऩे का असर

नेवादा राज्य के कीट विज्ञानी जेफ नाइट का कहना है कि झींगुरों के झुंड के इस कदर बढऩे की एक वजह इंसानी आबादी का बढऩा और जंगली इलाकों तक रिहाइश का फैलना है। सूखा भी इनके प्रकोप की बड़ी वजह है। सूखा पडऩे पर ये खाने की तलाश में निकलते हैं।