दरअसल, यह फैसला ट्रंप के चुनावी अभियान के दौरान किए गए वादे का परिणाम है। बता दें कि ट्रंप चुनाव के दौरान इसे खत्म करने की बात कही थी। हालांकि ट्रंप के इस फैसले का विरोध हो सकता है। उनके इस कदम से बिना दस्तावेज वाले लगभग साढ़े सात लाख से अधिक कर्मियों पर असर पड़ सकता है, जिनमें सात हजार से अधिक भारतीय-अमरीकी हैं। वहीं अमरीकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष पॉल रेयान ने कहा है कि ट्रंप को डीएसीए को खत्म नहीं करना चाहिए क्योंकि 'ये बच्चे अमरीका के अलावा किसी और देश को नहीं जानते हैं। वहीं माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने भी ट्रंप के कदम की आलोचना की है। डीएसीए की शुरुआत बराक ओबामा के सरकार में की गई थी ताकि वैध दस्तावेजों के बिना भी लाए गए बच्चों और युवाओं को निर्वासन से बचाया जा सके।