अमरीका ने ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स' को आतंकी संगठन घोषित किया

  • अमरीका ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है।
  • 1979 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स का गठन किया गया था।
  • आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने और विदेशी आतंकवाद को फैलाने को लेकर अमरीका ने उठाया यह कदम।

By: Anil Kumar

Updated: 10 Apr 2019, 06:54 AM IST

वाशिंगटन। अमरीका ने आखिरकार सोमवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर आईआरजीसी को आतंकी संगठन करार दे दिया है। इस संबंध में अमरीकी राज्य सचिव माइकल पोंपियो ने जानकारी देते हुए बताया कि ईरान की घातक महत्वकांक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है। आईआरजीसी को आतंकी संगठन घोषित करने को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि यह फैसला उनके अनुरोध पर आया है और यह पहली बार है कि किसी सरकार के सेना को अमरीका ने आतंकी ईकाई माना है। बता दें कि यह पहला ऐसा अवसर है जब अमरीका ने किसी दूसरे देश की सेना के अंग को आतंकी संगठन घोषित किया है। 1979 में गठन किए गए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स को आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद अब किसी भी तरह से ईरान की सरकार का बचाव नहीं कर सकती है। पोंपियो ने कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण फैसला है और ईरान द्वारा पोषित आतंकवाद को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम है। अमरीका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को आतंकी संगठन घोषित किया है, जिसमें क्योड्स बल (Qods Force) भी शामिल है। उन्होंने कहा कि हम ईरान के लोगों को यह अवसर देंगे कि वे आजादी की ओर फिर से बढ़ें। क्योड्स बल आईआरजीसी का ही एक अंग है।

ईरान आतंकवाद की मदद करता है: पोंपियो

अमरीकी राज्य सचिव माइकल पोंपियो ने कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल ईरानी सरकार की विदेशी नीति के केंद्र विन्दु में शामिल रहा है। आईआरजीसी और क्योड्स आतंक को फैलाने के लिए काम करते हैं। सोमवार को पोंपियो ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ईरानी सरकार की ओर से जब तक अपने घातक महत्वकांक्षाओं को नहीं छोड़ दिया जाता है तबतक अधिकतम दबाव बनाया जाएगा। पोंपियो ने मीडिया से बात करते हुए आगे कहा कि बहुत सारे चैप्टर में से यह एक चैप्टर है और अभी बहुत आना बाकी है। आईआरजीसी केवल ईरान के सुप्रीम नेता को जवाबदेह है। यह एक जैसे-को तैसा वाला सिद्धांत के तहत उठाया गया कदम है, क्योंकि ईरान ने इससे पहले अमरीकी सेना को काली सूची में डालने की धमकी थी।

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1979 में आईआरजीसी का हुआ था गठन

ईरानी क्रांति के बाद अप्रैल 1979 में आईआरजीसी का गठन किया गया था। ईरानी सैन्य बलों की एक शाखा आईआरजीसी को सऊदी अरब और बहरीन पहले ही आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। आईआरजीसी पर प्रतिबंध लगाने और इसे आतंकी संगठन घोषित करने को लेकर अधिकारी कई महीनों से बहस करते रहे थे। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जुलाई 2018 की रिपोर्ट में यह बताया गया था कि प्रशासन ऐसा करने पर विचार कर रहा है। बता दें कि इससे पहले बीते दिनों जब अमरीका की ओर से यह घोषणा की गई थी कि आईआरजीसी को आतंकी संगठन घोषित किया जाएगा, इसपर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। ईरान ने साफ-साफ अमरीका से कहा है कि यदि ऐसा हुआ तो वह भी पीछे नहीं हटेगा और अमरीकी सेना को लेकर ठोस कदम उठाएगा। ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यदि अमरीका ने ऐसा किया तो वह भी अमरीकी सेना को आतंकी संगठन घोषित करेगा और आतंकी संगठनों की सूची में डाल देगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अध्यक्ष हशमतउल्ला ने कहा था 'अगर अमरीका ने ऐसा किया तो हम भी उसकी सेना को आतंकियों की सूची में डालने से पीछे नहीं हटेंगे।'

 

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