
सुप्रीम कोर्ट ने जुआन गोइदो के देश छोड़ने पर पांबदी लगाई, बैंक खातों को सीज किया
कराकस। वेनेजुएला में स्वघोषित अंतरिम राष्ट्रपति जुआन गोइदो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने गोइदो के देश से बाहर जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। उनके तमाम बैंक खातों को सीज (रोक) करने का आदेश दिया है। वेनेजुएला में लगातार बढ़ते जा रहे राजनीतिक संकट के बीच ये सुप्रीम कोर्ट की बड़ी कानूनी कार्रवाई है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस माइकल मोरेनो ने कहा कि कोर्ट इस मामले में शुरुआती जांच शुरू कर रहा है। उन्होंने कहा कि गोइदो के खिलाफ लिए फैसले एहतियात के तौर पर उठाए हैं।
निकोलस मादुरो के लिए राहत भरा कदम
अदालत का ये फैसला राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लिए राहत भरा रहा है। वहीं गोइदो के लिए फैसले पर ट्रंप प्रशासन की ने काफी नारजगी साफ देखी जा सकती है। ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि अगर विपक्षी नेता गोइदो को किसी भी तरह का नुकसान हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ट्विट कर कहा है कि वह वेनेजुएला के पूर्व अटॉर्नी जनरल द्वारा जुआन गोइदो को दी गई धमकियों की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र के लिए खतरा बनेंगे और गोइदो को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे,उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
इसी माह कमान संभाली
इस महीने के शुरुआत में निकोलस मादुरो ने राष्ट्रपति पद की कमान संभाली थी। जिसके बाद जुआन गोइदो ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर देशभर में राष्ट्रपति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किए। बीते बुधवार को गोइदो ने मादुरो के खिलाफ हुई एक बड़ी रैली के दौरान को खुद को वेनेजुएला का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। देश में तख्तापलट जैसी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं।
संविधान और कानून उल्लंघन के गंभीर आरोप
इस मुद्दे पर जहां एक ओर रूस, चीन, तुर्की, क्यूबा, सीरिया और कई दूसरे देश राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को समर्थन दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अमरीका, कनाडा के अलावा ब्राजील, कोलंबिया, इज़रायल सहित दक्षिण अमरीका और यूरोप के कई देश नेशनल एसेंबली के प्रमुख जुआन गोइदो के समर्थन में हैं। राष्ट्रपति मादुरो ने गोइदो पर संविधान और कानून उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं। राष्ट्रपति मादुरो ने कहा कि गोइदो को अमरीका की आरे से मिलने वाला असीमित समर्थन इस बात की ओर इशारा है कि इसमें अमरीका के अपने निहित स्वार्थ हैं।
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Published on:
30 Jan 2019 10:54 am
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