अमेठी. अमेठी के दखिनवारा गांव में अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर है। यह शिव मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण 1669 ई. में किया गया था।
इस प्राचीन मंदिर की के बारे में जानने के लिए जब दखिनवारा गांव के राज वंसज बाबू गुरु प्रसाद सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वजों ने अपने पूर्वज से हमने अपने पूर्वजों से सुन है। लगभग 1669 ई में जब सभी देशों के मंदिर विध्वंस करने का आदेश दिया था तो औरंगजेब यहाँ भी आया था। जिसकी क्रूरता की गाथा मूर्तियों के कटे सिर,हाथ,पैर सुनाते है।औरंगजेब ने मूर्तियों को काट कर रख दिया था। यहां जो मन्दिर में बड़ी शिवलिंग बनी है उसे ओर-छोर तक 40 फुट तक खुदवाया पर आखरी तक उसे छोर नहीं मिला इसके बाद उसमें हाड़ा, बरैया निकली और औरंगजेब को समाचार मिला कि कोई बीमार है ये सुनकर उसने शिवलिंग पर कई बार प्रहार किया पर इसे ध्वस्त ना कर सका। आखिर थक हारकर यह से चला गया।
राज वंसज बाबू गुरु प्रसाद सिंह ने बताया कि, यहां जो लोग सच्चे मन से मन्नत मानते है वो पूरी होती है। सावन के दिन लोग हर सोमवार को यहां जल चढ़ाते हैं और शिवरात्रि को यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। जब यहाँ के पुजारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब औरंजेब ने हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था उस समय औरंगजेब इस मंदिर में आया था। और उसने मंदिर को ध्वस्त करने का प्रयास किया पर वह असफल रहा। औरंगजेब की क्रूरता इन मंदिरों में देखने को मिलती है उसके द्वारा किया गया तलवार से शिव लिंगी पर प्रहार आज भी निशान के रूप में देखने को मिलता है कई खंडित मूर्तियां मंदिर में विराजमान है।
उनका मानना है कि शिवलिंग द्वापर युग में पाण्डवों द्वारा अज्ञातवास के समय स्थापित किया गया था। मंदिर के पीछे लगभग दो किलोमीटर की परिधि में बना टीला भर्र राजा का किला हुआ करता था। भर्र राजाओं द्वारा इस शिवलिंग पर भव्य विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया था।
तदुपरांत भर्र राज्य को समाप्त कर क्षत्रियों का आधिपत्य हो गया। आज भी दखिनवारा मे एक छोटे से रियासत के क्षत्रिय वंशज रहते हैं। मुगल वंश का क्रूर शासक औरंगजेब ने किले पर आक्रमण किया, मंदिर को लूटा तथा पूरी तरह से तहस नहस कर दिया। मूर्तियों को भी क्षति पहुंचाई, जिसके अवशेष आज भी मंदिर परिसर में विद्यमान हैं। मुगल काल के बाद अंग्रेजी शासन में हिन्दुओं द्वारा मंदिर का पुनः निर्माण कराया गया, जो आज तक विद्यमान है तथा श्री बिल्वेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ पर प्रत्येक वर्ष शिव रात्रि के अवसर पर विशाल मेला लगता है तथा श्रावण मास में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।