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अमेठी सीट का रोचक इतिहास, 16 बार कांग्रेस ने लहराया जीत का परचम, सिर्फ एक बार जीती बीजेपी

नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ कही जाने वाली अमेठी यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से एक है। ज्यादातर इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा

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अमेठी सीट का रोचक इतिहास, 16 बार कांग्रेस ने लहराया जीत का परचम, सिर्फ एक बार जीती बीजेपी

अमेठी. नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ कही जाने वाली अमेठी यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से एक है। अब तक ज्यादातर इस सीट पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। हालांकि, कुछ एक चुनाव ऐसे जरूर हुए जब कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा लेकिन अगले चुनाव में शानदार रणनीति के साथ कांग्रेस ने विपक्षी दलों को मात देकर जीत दर्ज की।

अमेठी लोकसभा सीट का इतिहास

अमेठी लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो पाया जाएगा कि इस संसदीय क्षेत्र में ज्यादाबार कांग्रेस का दबदबा रहा है। इंदिरा गांधी से लेकर अब राहुल गांधी तक अमेठी वासियों ने अन्य दल की जगह कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा जताया है। स्वतंत्र भारत में पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव का गठन हुआ। हालांकि, उस वक्त अमेठी सुल्तानपुर दक्षिण लोकसभा सीट का ही हिस्सा माना जाता था, जहां से कांग्रेस बालकृष्ण विश्वनाथ केशकर सांसद बने थे। 1957 में यह क्षेत्र मुसाफिरखाना लोकसभा सीट का हिस्सा बना और केशकर तब भी यहां के सांसद बने रहे।

1962 के लोकसभा चुनाव में राजा रंणजय सिंह मुसाफिरखाना लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। 1967 के आमचुनाव में अमेठी लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। इस नई सीट पर कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी सांसद बने। तब उन्होंने बीजेपी के गोकुल प्रसाद पाठक को 3,665 वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद 1971 में विद्याधर वाजपेयी दोबारा अमेठी के सांसद बने।

1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने राजा रणंजय सिंह के बेटे संजय सिंह को प्रत्याशी बनाया। लेकिन तब वे जनता पार्टी से चुनाव हार गए और भारतीय लोकदल के रविंद्र प्रताप सिंह सांसद चुने गए। ये पहली बार था जब कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 1980 में कांग्रेस ने एक बार फिर इस सीट से अपनी जीत का परचम लहराया जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी यहां से सांसद बने।

23 जून,1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद 1981 के उपचुनाव में इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी ने अमेठी की बागडोर संभाली। इसके बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी एक बार फिर अमेठी के प्रत्याशी बने। उन्होंने जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह को 1,278,545 वोटों के अंतर से हराया था। 1989 और 1991 के लोकसभा चुनावों में राजीव गांधी एक बार फिर अमेठी से कांग्रेसी की सीट पर सांसद बने।

प्रचार करने गए राजीव गांधी की कर दी हत्या

1991 के लोकसभा चुनावों के दौरान 20 मई को पहले चरण की वोटिंग हुई। 21 मई को राजीव गांधी प्रचार के लिए तमिलनाडू गए हुए थे। तब इस दौरान ही उनकी हत्या कर दी गयी। 1991 और 1996 में अमेठी लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ जिसके बाद कांग्रेस के सतीश शर्मा सांसद बने। हालांकि, 1998 मेंं कांग्रेस को दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा जब भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह ने सतीश शर्मा को 23,270 वोटों से हराया था।

1999 में सोनिया ने जीता चुनाव

1999 में कांग्रेस से राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी चुनावी मैदान में उतरीं और उन्होंने संजय गांधी को 3 लाख से भी अधिक वोटों से हराया। इसके बाद 2004 के 14वें लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने बसपा प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मिश्रा को 2,90, 853 वोटों के अंतर से हराया। 2009 में भी राहुल ने अमेठी सीट से जीत दर्ज की। इस बार जीत का अंतर 3,50,000 से भी ज्यादा रहा। 2014 में राहुल गांधी इस सीट से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए। उनके खिलाप भाजपा की ओर से स्मृति ईरानी मैदान में उतरी थीं। हालांकि, तब जीत का अंतर महज 1,07,000 वोट थे।

किस पार्टी ने कब दर्ज की जीत

अब तक के हुए 16 लोकसभा चुनावों और 2 उपचुनाव में कांग्रेस ने 16 बार जीत का परचम लहराया। सिर्फ दो बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा जब 1977 में भारतीय लोकदल और 1998 में बीजेपी ने इस सीट पर जीत दर्ज की।

जातीगत समीकरण

कुल मतदाता-18 लाख 87 हजार है

पुरुष-10 लाख 78 हजार 400

महिला - 8 लाख 8 हजार 485

थर्ड जेंडर-56

पोलिंग बूथ-1963