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बदहाली की कगार पर पहुंचा बाबा गोरखनाथ का जन्म स्थल, लोगों को सीएम का है इन्तजार

अमेठी जिले के जायस में गुरु गोरक्षनाथ का जन्म स्थान आज भी बदहाल है।

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Gorakshnath

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अमेठी. प्रदेश के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ अपने व्यस्तम समय में से अपने गुरु के मठ गोरखपुर हमेशा जाते रहते हैं और वहां खास तरह से पूजा अर्चना भी समय-समय से करते रहते हैं, लेकिन अमेठी जिले के जायस में गुरु गोरक्षनाथ का जन्म स्थान आज भी बदहाल है। सवाल ये है कि वीवीआईपी अमेठी में सूबे की सरकार के दिशानिर्देश पर अमल क्यों नहीं दिख रहा, वही जिले के प्रतिष्ठित बदहाल के इस धाम पर यहाँ के लोगों को आज भी मुख्यमंत्री के आने का इंतजार है।

अमेठी जिले के जायस कस्बे में गोरक्षनाथ का जन्म स्थान आज भी स्थित है, जो कई सालों से देख रेख के अभाव में बदहाल हो चुका है। इस स्थान को लेकर यहाँ के लोगों की माने तो गोरखनाथ के जन्म को लेकर तमाम तरह की बातें हैं और कई पुराणों की किताबो में इनके बारे में लिखा है।

गोरक्षनाथ के जन्म के बारे में एक कहानी जो सब से ज्यादा प्रचलित है उसमें कहा जाता है कि एक बार गोरक्षनाथ के गुरु मतसेन्द्र नाथ यहाँ से गुजर रहे थे कि रास्ते में एक ब्राम्हण महिला मिली जो मायूस बैठी थी। उसको देखकर मतसेन्द्र नाथ ने रुक कर उससे कारण पूछा। तब महिला ने बताया कि मेरा कोई पुत्र नहीं है। इसके बाद मतसेन्द्रनाथ की उस महिला ने बहुत सेवा की जिससे प्रसन्न होकर मतसेन्द्र नाथ ने महिला को भभूती दी और ब्रम्हण महिला से कहा की इसको नहा धोकर तुम खा लेना और वहाँ से चले गई। लेकिन महिला तो विधवा थी और लोक लज्जा के डर से महिला ने भभूती को एक गोबर के ढेर में फेंक दिया।

12 वर्ष बाद उसी रास्ते से मतसेन्द्रनाथ गुजर रहे थे तो उसी उदास महिला को देख कर बोले की तुम्हारा पुत्र कहा है। महिला ने अपनी सारी बात बता दी, तब मतसेन्द्र नाथ ने कहा की मुझे उस गोबर के ढेर के पास ले चलो और वहां पहुंच कर तीन बार गोरक्ष गोरक्ष बोला जिसके बाद वहां एक तेजस्वी 12 साल का बालक सामने आता दिखाई दिया। जिसे बाबा ने गोरक्षनाथ नाम दिया।

वहीं इस मामले पर अमेठी के बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों का कहना है कि बाबा गोरखनाथ की असली जन्मस्थली यही है। कई पुराणों के साथ ही महाकवि मलिक मोहमद जायसी ने अपने उपन्यास में इसका जिक्र किया है। अमेठी के जायस कस्बे में स्थित बाबा गोरखनाथ की जन्मस्थली को लेकर स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाबा की जन्मस्थली देख रेख के अभाव में बहुत ही बदहाल हो चुकी है। जिस प्रकार मुख्यमंत्री गोरखपुर पीठ जाते है उसी प्रकार उन्हें यहाँ भी आना चाहिए, जिससे कि इस स्थान का भी विकास हो सके।