11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

अमेठी से कांग्रेस को बड़ा झटका, राहुल के खिलाफ मैदान में उतरेंगे सोनिया के करीबी

2019 लोकसभा चुनाव से सत्ता में अपनी वापसी की राह देख रही कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है

2 min read
Google source verification

अमेठी. सात दशकों से कांग्रेस के प्रति लॉयल रहे हाजी मोहम्मद हारून राशिद पार्टी के खिलाफ बगावत पर उतर आए हैं। उन्होंने एलान किया है कि वे अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। जब राजीव और सोनिया गांधी ने अमेठी से नामांकन दाखिल किया था तब हाजी मोहम्मद हारून के पिता उनके प्रस्तावक हुआ करते थे।
हाजी मोहम्मद हारून ने अमेठी से अपना मोहभंग होने का कारण विकास और परिवर्तन की कमी होना बताया है। उनका कहना है कि कांग्रेस के कहने और करने में बहुत अंतर है। अमेठी के अलावा कोई और स्थान इसे बेहतर तरीके से नहीं समझा सकता। कांग्रेस और बीजेपी में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि मैने राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का मन बनाया है ताकि चीजें बेहतर हो सकें। वे अपनी नहीं कौम की लड़ाई लड़ना चाहते हैं और इसकी शुरुआत अमेठी से होगी। मोहम्मद हारून ने कहा कि उनके चुनाव लड़ने के फैसले से कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी को भी फर्क पड़ेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों एक ही सिक्के के पहलू हैं।

रोजगार को देंगे बढ़ावा

हाजी मोहम्मद हारून कांग्रेस सरकार में मुसलमानों के विकास न होने से भी नाराज हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी ने कभी भी मुस्लिम एजुकेशन या रोजगार के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया। मुस्लिम समुदाय के आधे से ज्यादा हिस्से को एजुकेशन और रोजगार की जरूरत है और वे इन दो बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा का कहना है कि हारून रशीद के पिता सुल्तान बहुत पुराने कांग्रेसी हैं। वे सोनिया गांधी के बहुत करीबी रहे हैं। हालांकि, हारून रशीद कांग्रेस पार्टी में कोई पदाधिकारी नहीं रहे। उन्होंने कहा कि अमेठी की जनता अच्छी तरीके से जानती है उसकी पहचान उसका मान सम्मान किस परिवार के द्वारा निहित है। गांधी परिवार हमेशा सुख दुःख में साथ खड़ा रहा है। यह लोकतंत्र है और किसी को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि ये लड़ाई उस विचारधारा से है जो देश की एकता अखण्डता को खत्म करने का काम कर रही है। राहुल गांधी उस लड़ाई से लड़ रहे हैं।