सालरिया स्थित देश के पहले गोअभयारण्य में सड़ा सुखला खाने से गायों की मौत हो रही है। यह सिलसिला १५ दिनों से जारी है। रोज १० से २० गायों की मौत हो रही ह
सुसनेर. मुकेश हरदेनिया
सालरिया स्थित देश के पहले गोअभयारण्य में सड़ा सुखला खाने से गायों की मौत हो रही है। यह सिलसिला १५ दिनों से जारी है। रोज १० से २० गायों की मौत हो रही है। १५ दिन में करीब ३०० गायें दम तोड़ चुकी हैं।
रविवार को जब पत्रिका टीम अभयारण्य पहुंची तो दंग रह गई। मौके पर एक भी शासकीय कर्मचारी नहीं थी। यही नहीं सालरिया निवासी ग्रामीण मरी गायों को ट्रैक्टर में ढो रहे थे। कुछ मजदूर मिले जिन्होंने बताया 15 दिन से रोज सड़ा सुखला खाने से 10 से 20 गायें रोज मर रही हैं। इन्हें अभयारण्य के पीछे स्थित नाले में जेसीबी से गड्ढा खेादकर गाड़ रहे हैं।
मजदूर बोले सड़ा सुखला खा रही
अभयारण्य में पहुंची टीम ने गायों को सुखला डालने वाले मजदूरों से पूछा तो उन्होंने एकमत से बताया 17 शेड है। हर शेड में 200 से 300 गायें हैं। देखरेख के लिए महिला व पुरुषों को लगा रखा है। ये गायों की देखभाल करते हैं। इन्होंने बताया यहां पदस्थ सरकारी कर्मचारी दोपहर 12 बजे आते हैं और दो बजे वापस चले जाते हैं। वर्तमान में गायों को खिलाने के लिए सोयाबीन का सुखला है जो सड़ा हुआ है। इसे खाने से रोज गायें मर रही हैं। दुलेसिंह पिता हरिसिंह, गणपत पिता बालू, प्रताप पिता करण सिंह, गणपत पिता रूगनाथ, नाहर सिंह पिता बालूसिह, जतनबाई पिता भंवरसिंह, चंदाबाई पति बाबूलाल, लीलाबाई पति रामलाल मौजूद थीं।
ट्रैक्टर में भरकर फेंकने जा रहे थे
दल ने मौके पर देखा शेड से मरी गायों को एकत्र कर रहे ट्रैक्टर में डाला रहा है। इन गायों को गड्ढों में फेंका जा रहा है, जबकि प्रशासन का दावा था कि यहां मरी गाय के प्रत्येक अंग का उपयोग किया जाएगा।
करोड़ों खर्च करने के बाद भी सुविधा जीरो
प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर कर्मचारियों के लिए आवास बनाए हैं जो सब खाली पड़े हैं। यहां कृषक प्रशिक्षण केंद्र, उत्पादन केंद्र, अनुसंधान केंद्र सहित पशु चिकित्सालय हैं, परंतु सभी जगह ताले लटके हैं।
कालेश्वर गोशाला अध्यक्ष ने की जांच की मांग
सालरिया गो अभयारण्य के समीप स्थित कालेश्वर गोशाला अध्यक्ष लालसिंह सिसौदिया ने बताया 15 दिन से लगातार रोज 10 से 20 गायें मर रही हैं। अभी तक 300 से अधिक गायों की मौत हो गई। मामले की निष्पक्ष जांच की जाना चाहिए।
सुखला हटाने को कहा है
सड़ा सुखला हटाने के लिए संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए हैं। सोयाबीन जो सुखला खराब था वह गायों को नहीं डालने को कहा है। अब गेहूं का सुखला ही दिया जा रहा है।
डॉ. वीएस कोसरवाल, सहायक संचालक गो अभयारण्य, सुसनेर
मामला मेरी जानकारी में आया है। मैंने तुरंत सड़ा सुखला हटावा दिया है। गायों के लिए गेहूं के सुखले की व्यवस्था करवा दी है। मामले की मैं स्वयं जांच कर रहा हूं। जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी।
अजय गुप्ता, कलेक्टर आगर