
आगर-मालवा से दुर्गेश शर्मा की रिपोर्ट
Agar Malwa Social Harmony: मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले के ग्राम फतेहपुर मेंढकी में सोमवार को सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म होने का संदेश दिया। गांव में एक ही दिन ब्राह्मण समाज के सत्यनारायण शर्मा और अनुसूचित जाति वर्ग के नारायण मालवीय के निधन के बाद ग्रामीणों ने दोनों की अंतिम यात्राएं अलग-अलग निकालने के बजाय एक साथ निकालने का निर्णय लिया। देखते ही देखते पूरा गांव इस पहल का सहभागी बन गया और दोनों बुजुर्गों को एक साथ गाजे-बाजे के साथ अंतिम विदाई दी गई।
ग्राम फतेहपुर मेंढकी निवासी सत्यनारायण शर्मा (67) का लंबी बीमारी के बाद सोमवार सुबह निधन हो गया। परिवार और समाजजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे ही थे कि कुछ ही समय बाद गांव के नारायण मालवीय (65) का हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया। एक के बाद एक हुई दो मौतों से गांव में शोक की लहर छा गई। दोनों परिवारों में मातम का माहौल था। इसी बीच ग्रामीणों ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने पूरे घटनाक्रम को सामाजिक समरसता की मिसाल बना दिया। युवाओं ओर वरिष्ठजनों के बीच हुई आपसी चर्चा के बाद दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकालने का निर्णय लिया। इसके लिए समीपवर्ती उज्जैन जिले के माकड़ौन कस्बे से बैंड-बाजे बुलाए गए। इसके बाद दोनों अर्थियों को एक साथ सजाकर अंतिम यात्रा निकाली गई।
गाजे-बाजे के साथ जब दोनों अर्थियां गांव की गलियों से एक साथ गुजरीं तो बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले दोनों व्यक्तियों की अंतिम यात्रा का एक साथ निकलना गांव में चर्चा का विषय रहा। इस दौरान ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि जीवन की अंतिम यात्रा में जाति और सामाजिक भेद की दीवारों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। इंसान की पहचान उसके समाज से पहले उसकी इंसानियत और गांव से उसके रिश्ते से होती है। गांव के लोगों का कहना था कि सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना ही ग्रामीण जीवन की सबसे बड़ी ताकत है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने दोनों परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और इस पहल को गांव की पुरानी सामाजिक एकजुटता और भाईचारे की परंपरा का प्रतीक बताया।