आगरा

12 साल तक कागजों में मरा, हकीकत में जिंदा: आगरा में स्कूटी चलाता मिला ‘मुर्दा’ आरोपी; पुलिस भी हैरान

Agra News: आगरा में 27 साल पुराने मुकदमे में खुद को मृत घोषित कर केस बंद कराने वाला आरोपी 12 साल बाद जिंदा मिला। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे कानून को चकमा देने का यह मामला पुलिस जांच में उजागर हुआ, जिससे न्यायिक व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आई।
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Updated: 7 Feb 2026, 7:01 PM IST
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आगरा में स्कूटी चलाता मिला ‘मुर्दा’ आरोपी | Image Video Grab

Dead man alive in Agra: आगरा जिले में कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आरोपी ने खुद को मृत घोषित करवा कर न सिर्फ गिरफ्तारी से बचाव किया, बल्कि अदालत से अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को भी बंद करवा दिया। हैरानी की बात यह है कि 12 वर्षों तक कानूनी रूप से ‘मृत’ माने जाने के बावजूद आरोपी पूरी तरह जीवित रहा और सामान्य जीवन जीता रहा।

1999 में दर्ज हुआ था कूटरचित दस्तावेज का मुकदमा

यह मामला वर्ष 1999 का है, जब थाना हरीपर्वत क्षेत्र में राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी एवं अन्य के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों से जुड़ा एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया था। इस केस में तारा चंद्र शर्मा मुख्य आरोपियों में शामिल थे। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान आरोपी गिरफ्तारी से बचने के रास्ते तलाशता रहा।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से बंद कराया गया केस

मुकदमे से बचने के इरादे से वर्ष 2013 में तारा चंद्र शर्मा की ओर से अदालत में एक मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया गया, जिसमें उनकी मृत्यु वर्ष 1998 में दर्शाई गई थी। थाना हरीपर्वत पुलिस द्वारा पड़ोसियों के हस्ताक्षर लेकर इस प्रमाण पत्र की पुष्टि कर दी गई। इसी आधार पर अदालत ने 20 सितंबर 2013 को आरोपी को मृत मानते हुए उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी।

12 साल बाद ‘मृत’ आरोपी से हुआ आमना-सामना

मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब वादी राजकुमार वर्मा ने 5 नवंबर 2025 को गांधी नगर इलाके में उसी आरोपी तारा चंद्र शर्मा को स्कूटी चलाते हुए देखा, जिसे अदालत 12 साल पहले मृत घोषित कर चुकी थी। वादी ने तत्काल सतर्कता दिखाते हुए आरोपी की तस्वीरें लीं और पूरे मामले की सच्चाई जानने का फैसला किया।

RTO जांच में खुली फर्जी मौत की परतें

वादी द्वारा स्कूटी के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर RTO कार्यालय में कराई गई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस व्यक्ति को वर्ष 1998 में मृत दिखाया गया था, उसी के नाम पर जुलाई 2016 में स्कूटी का पंजीकरण पाया गया। इसके साथ ही यह भी सामने आया कि आरोपी सक्रिय रूप से बैंक खाते, मोबाइल बैंकिंग और अन्य सरकारी सेवाओं का उपयोग कर रहा था।

कोर्ट के आदेश पर पुलिस जांच शुरू

वादी द्वारा अदालत में ठोस साक्ष्य पेश किए जाने के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने थाना न्यू आगरा से जांच रिपोर्ट तलब की। जांच की जिम्मेदारी SI मधुर कुशवाह को सौंपी गई, जिन्होंने पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू की।

घर पर जिंदा मिला ‘मृत’ घोषित आरोपी

पुलिस जांच के दौरान तारा चंद्र शर्मा अपने घर पर पूरी तरह जीवित पाए गए। उनके पुत्र आशुतोष शर्मा ने पुलिस को बयान देते हुए बताया कि उनके पिता वृद्धावस्था के कारण अधिकतर घर पर रहते हैं और कभी-कभार स्कूटर चलाकर बाहर निकल जाते हैं। पुलिस ने आरोपी और उनके पुत्र की तस्वीरें लेकर उन्हें साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश किया।

अब फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई की मांग

वादी राजकुमार वर्मा ने अदालत से मांग की है कि 20 सितंबर 2013 के उस आदेश को निरस्त किया जाए, जिसके तहत आरोपी को मृत मानकर केस बंद किया गया था। साथ ही आरोपी के खिलाफ फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, अदालत को गुमराह करने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोपों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

Updated on:
7 Feb 2026, 7:01 PM IST
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