पति के शव को ले जाना चाहती थी बिहार, पर नहीं मिली एम्बुलेंस
आगरा। यूं तो सरकार स्वास्थ्य वादों के लाख दावे करती है। स्वास्थ्य गारंटी योजना, स्वास्थ्य बीमा आदि योजनाओं के ख्वाब दिखाकर लोगों को आकर्षित किया जाता है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आज भी लोग जूझते नजर आते हैं। अक्सर खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि मृत्यु हो जाने पर एंबुलेंस नहीं मिलती है, कोई शव को साइकिल से ले जाता है, तो कोई कंधे पर रखकर अपने घर ले जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा आगरा में देखने को मिला। दिल्ली में ईंट भट्ठों पर काम करने वाले युवक की आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। अब मृतक के शव को उसके घर तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। उसकी पत्नी परेशान होकर इधर उधर भटक रही थी।
ये है मामला
परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला था, मृतक अजय और उसकी पत्नी दयावती दिल्ली के पास ईंट भट्ठों में काम करते थे। जब वह दिल्ली से आगरा आ रहे थे तो रास्ते में आईएसबीटी पर हालत बिगड़ने लगी, पुलिस ने गंभीर हालत में अजय को एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया लगभग। 1 सप्ताह भर्ती रहने के बाद रविवार की रात लगभग 11:00 बजे अजय की मृत्यु हो गई, शव को पोस्टमार्टम गृह भेज दिया गया। मृतक के साथ अकेली रह रही दयावती पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह अपने पति के शव को ले जाने के लिए डॉक्टरों से मिन्नतें करने लगी, लेकिन सभी ने कह दिया कि इसका अंतिम संस्कार आगरा में ही कर दो। शव बिहार नहीं जा पाएगा। महिला दर-दर भटक रही थी, लेकिन उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था।
समझा दर्द
वह दहाड़ मार कर रो रही थी, इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस उस महिला से मिले। वह महिला को साथ लेकर एसएन प्रधानाचार्य डॉक्टर सरोज सिंह एवं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय अग्रवाल से मिले। एंबुलेंस की व्यवस्था की मांग की, तो उन्होंने स्पष्ट इंकार कर दिया कहा कि हम केवल स्थानीय क्षेत्र में ही शव को भेज सकते हैं, बिहार ले जाने के लिए आपको खुद व्यवस्था करनी होगी। नरेश पारस महिला को लेकर आगरा कलेक्ट्रेट पहुंचे, वहां प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी उस महिला के दर्द को नहीं समझा। थक हार कर वह एसएन मेडिकल कॉलेज आ गए। चारों ओर से हताश हो गए, तब नरेश पारस ने मामला सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। महिला के दर्द को उन्होंने लाइव दिखाया। सोशल मीडिया पर लोगों ने एसएन और आगरा प्रशासन की संवेदनहीनता पर नाराजगी व्यक्त की।
शासन तक पहुंची आवाज
मामला शासन तक पहुंचा तो स्थानीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन फानन में एंबुलेंस की व्यवस्था कराई गई और डॉक्टरों ने बिना पोस्टमार्टम के ही शव को भेजने की तैयारी कर ली। जैसे ही पुलिस को पता चला तो पुलिस ने डॉक्टरों को रोक दिया कहा बिना पोस्टमार्टम के शव नहीं ले जाने देंगे। मामला डीएम तक पहुंचा तो रात में ही पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए। रात करीब 12:30 बजे पोस्टमार्टम हो सका और लगभग एक बजे शव को बिहार भेजा गया। महिला के साथ एक नर्सिंग स्टाफ और एक पुलिस कांस्टेबल भी भेजा गया।