होली मिलन के लिए आने वालों को खिलाई जाती हैं खोआ से बनीं गुजिया
आगरा। बृज में होली का उत्सव विशेष उमंग और उल्लास से मनाया जाता है। होली मिलन के लिए आने वाले लोगों को खोवा से बनीं खास मिठाई खिलाई जाने की परंपरा है। बृज में ये मिठाई बड़ी लगन और मेहनत के साथ बनाई जाती है। सबसे पहले ठाकुरजी को होली के लिए बनाए गए व्यंजनों में गुजिया का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद घरों के सदस्यों के लिए इसे परोसा जाता है।
खोआ और मेवा ने कसैला कर दिया गुजिया का स्वाद
गुजिया मैदा का मिश्रण तैयार कर खोआ भरकर बनाई जाती है। हर घर में ये मिठाई बनाई जा रही है। लेकिन गुजिया बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के महंगे होने से इसका स्वाद कसैला हो गया है। दुकानदार राहुल अग्रवाल ने बताया कि बाजार में मेवा का भाव होली का त्योहार होने के चलते आसमान छू रहा है। गुजिया में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में चीनी या बूरा, किसमिश, खोआ, गिरी, चिरौंजी, इलायची आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इस बार गिरी का भाव यकायक बढ़ गया। वहीं चिरौंजी के दाम भी आसमान छू रहे हैं। बाजार में छोटी इलायची के रेट भी बढ़े हैं। बढ़ी कीमतों का असर इस व्यंजन पर पड़ रहा है। लोेग बहुत कम सामान के साथ इस मिठाई को बना रहे हैं।
महिलाओं ने बनाई गुजिया, बताई विधि
आगरा के शास्त्रीपुरम बी ब्लॉक में राम नारायण के आवास पर महिलाओं ने गुजिया बनाई। महिलाओं ने बताया कि किस प्रकार गुजिया बनाई जाती है। गुजिया को शुद्ध भोग के रूप में जाना जाता है। मैदा को गूंदने के बाद उसकी लोई बनाकर एक सांचे में ढाल दिया जाता है और उसमें खोआ का तैयार मिश्रण बनाया जाता है। इसके बाद गुजिया को एक पवित्र स्थान पर ढंककर रखा जाता है। गुजिया बनाने के दौरान श्रीकृष्ण के भजन गाए जाते हैं या फिर मौन रहकर इसे बनाया जाता है। होली मिलन में आने वाले लोगों को इसे भेंट किया जाता है।