शोषण करने में बैंकें भी पीछे नहीं
आगरा। सरकार भले ही लाख दावे करे कि किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिल रहा है या फिर मिलेगा। ये बातें महज खोखले दावे साबित हो रही हैं। सरकार ने किसानों के लिए अनेक योजनाएं चलाई हों, लेकिन पचास प्रतिशत किसान ऐसे हैं, जिन्हें सरकार की योजनाओं की जानकारी भी नहीं है। अन्नदाता दिन रात एक कर फसल तैयार करता है और जब फसल को मंडी में बेचने के लिए जाता है तो उसे उचित मूल्य नहीं मिलता। किसान अपनी जमीन को साहूकारों और बैंकों के पास गिरवी रखकर खेती में लागत लगाता है।
आलू के गढ़ में किसानों का बुरा हाल
गौरतलब है कि खंदौली क्षेत्र आलू का गढ़ माना जाता है। लेकिन, पिछले दो-तीन सालों से किसानों को फसल में हो रहे नुकसान के चलते परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। कर्ज लेकर किसान कई सालों फसल कर रहा है लेकिन, फसल का सही मूल्य न मिल पाने के चलते वो कर्ज तले दबा हुआ है।
बैंकों से भी नहीं मिल रहा लाभ
लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपये के कर्ज माफ करने वाली सूबे की सरकार की बैंकें किसानों के साथ अन्याय कर रही हैं। बैंक से किसानों को फिर ऋण लेने के लिए बैंक कर्मचारियों को मोटा कमीशन देना पड़ रहा है। किसानों से बैंककर्मी आठ से बारह प्रतिशत तक कमीशन ले रहे हैं। देहात क्षेत्रों की बैंकों में मैनेजर और अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते दलालों का बोलबाला है। ये दलाल किसानों का लोन न होने पर उन्हें बरगलाकर बैंक कर्मियों से सांठगांठ कर कमीशन फिक्स कराकर उनका काम करा देते हैं। लोन कराने के एवज में दलाल कमीशन के रूप में अपना हिस्सा ले लेते हैं। यह अधिकतर देहात की बैंकों में यह देखने को मिल रहा है।
किसान परेशान
आगरा के आलू किसान अरविंद जुरैल, मुकेश कुमार, रामनरेश, रमनेश सिंह का कहना है कि सरकार ने मुआवजे के नाम पर उनका धोखा किया है। किसानों को उनकी फसल का सही भाव मिले तो उन्हें किसी भी मुआवजे की कोई जरूरत नहीं है। सूबे की सरकार द्वारा की गई कर्ज माफी से अभी भी अनेक किसान वंचित हैं। उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा का अभी तक लाभ नहीं मिल सका है।