आगरा

जीएसटी का एक सालः पेट्रोल – डीजल के रेट में फंसा सर्राफा, व्यापार हो रहा चौपट

पेट्रोल - डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर होने के चलते सर्राफा कारोबारी इसमें पूरी तरह फंस गया है।

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Jul 01, 2018
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आगरा। पेट्रोल - डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर होने के चलते सर्राफा कारोबारी इसमें पूरी तरह फंस गया है। आगरा के सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि एक स्टेट से दूसरे स्टेट में इसके चलते व्यापार करने में सबसे बड़ी समस्या आ रही है। क्योंकि सभी स्टेट में जीएसटी तो समान हैं, लेकिन पेट्रोल - डीजल का रेट समान नहीं है, जिसके चलते माल भाड़े पर बड़ा असर पड़ रहा है। इससे व्यापारी प्रभावित हो रहा है।

समझ ही नहीं पाए किस तरह करना है व्यापार
व्यापारी नेता मनोज गुप्ता ने बताया कि केन्द्र सरकार ने जीएसटी लगाया, सबसे बड़ी खामी ये रही कि व्यापारियों को पूरी तरह नियम ही नहीं समझाए गए, कि व्यापारियों को जीएसटी में किस तरह काम करना है। क्योंकि वेट की प्रणाली में और जीएसटी की प्रणाली में बहुत बड़ा अंतर है। जीएसटी प्रणाली पूरी तरह तकनीकि पर आधारित है और तमाम व्यापारी ऐसे होते हैं, जो कम पढ़े लिखे होते हैं। उन सभी व्यापारियों को अपना रिर्टन दाखिल करने के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ा, जिससे उनका व्यापार प्रभावित हुआ।

वर्तमान में ये है सबसे बड़ी समस्या
सबसे बड़ी समस्या जो आज वर्तमान में है, जब व्यापारी जीएसटी में अपना रिर्टन दाखिल करते हैं महीने के अंत में, चूंकि इनका तीकनीकि सिस्टम सही नहीं हैं और ये पूरी तरह तैयार नहीं हैं। रिर्टन दाखिल करते समय लोड हो जाता है और व्यापारियों के रिर्टन दाखिल नहीं होते हैं और रिर्टन दाखिल न होने के चलते लोगों के रिफंड फंस जाते हैं और रिफंड न मिलने से उनका व्यापार प्रभावित होता है। क्योंकि रिफंड की पूंजी अच्छी तादात में होती है। मानना ये है कि 40 से 50 फीसद भी लोगों का रिफंड रहता है। उस मामले में अभी तक सरकार ने कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की। सरकार को तकनीकि सिस्टम सही करना चाहिए, जिससे व्यापारियों को ये दिक्कत न हो।

ये है बड़ी समस्या
दूसरी बड़ी समस्या ये आ रही है कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है, ऐसे में एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भाड़ा बढ़ने से जीएसटी की दरें जो सभी प्रदेशों में समान होती हैं, उनमें फर्क आ जाता है। फर्क आने से व्यापारियों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। क्योंकि जहां डीजल पैट्रोल का रेट कम हैं, वहां व्यापारी सस्ता माल बेच रहा है और दूसरे राज्य के व्यापारी नहीं बेच पाते हैं। वहीं उस प्रदेश के व्यापारी जब दूसरे स्टेट में माल बेचते हैं, तो उन्हें भी समस्या आती है।

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Published on:
01 Jul 2018 09:05 am
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