आगरा

मोहब्बत के शहर में हजारों लोग सो जाते हैं सपने देखकर, नहीं भरता है इनका पेट !

कई वर्षों से इस दिन को किया जाता है याद, नहीं हो रही समस्या खत्म

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Oct 16, 2017
Campaign to remove malnutrition of children

संतोष कुमार पाण्डेय

आगरा । जो शहर पूरी दुनिया में मोहब्बत के लिए जाना जाता हो उसी शहर में हजारों बच्चे और लोग भूखे पेट सो जाते है। गांव का हाल तो और ही बदहाल है। हजारों लोग केवल सपने देखकर सो जाते हैं कि उन्हें अगले दिन भोजन मिलेगा। फिर दूसरा दिन आया और वह भी बिना भोजन के निकल गया। ऐसे ही वर्षों से चल रहा है। कुछ भी खाकर पेट भर लेते हैं। शहर के कई ऐसे इलाके है जहां पर बच्चों के साथ उनके परिजन केवल रह रहे हैं लेकिन उन्हें भोजन नसीब नहीं होता।

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16 अक्टूबर को World Food Day है। इस दिन जिले में कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बच्चों के साथ सभी को भोजन देने की बात की जाती है। इतना ही नहीं कई योजनाओं की घोषणा भी हो जाती है। सवाल इतना है कि केवल अनाज के अधिक उत्पादन से ही इसका हल नहीं निकाला जा सकता। हजारों टन अनाज सड़ जाता है। भंडारण की व्यवस्था अच्छी न होने से अनाज सही मात्रा में नहीं बच पाता।

अच्छी ट्रेनिंग की है जरूरत

बीचपुरी कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉक्टर राजेन्द्र सिंह चौहान बताते है कि किसानों की स्थिति ठीक न होने से अनाज के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। जब अनाज का उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं होगा तो स्थिति विकट होगी। आगरा जिले के किसान खाद्यान्य का भंडारण भी सही से नहीं कर पाते। उन्हें अच्छी ट्रेनिंग की जरूरत है। 33 प्रतिशत अनाज सही भंडारण न होने से सड़ जाता है।

IMAGE CREDIT: patrika

यहां गंभीर समस्या

बच्चों को हक दिलाने के लिए काम करने वाले नरेश पारस ने बताया कि आगरा सदर तहसील के पास डीआईओएस कार्यालय के पास एक वर्ग का परिवार रहता है, जिनकी संख्या 50 के आसपास है। उन्हें भोजन नहीं मिलता। उनके पास तो न राशन कार्ड है और न ही आधार कार्ड। भूखे पेट उनका परिवार सो जाता है। पारस ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब हजारों बच्चे और लोग प्रतिदिन भूखे पेट सो रहे हैं। इनकी मांग है कि सभी बच्चे और परिवार के सदस्य को भोजन मिले।

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वर्ष 2015 में यहां आई थी गिरावट

आगरा जिले के आरएफसी (रीजनल फूड कॉर्पोरेशन) के बड़े गोदामों रुनकता, शाहदरा नुनिहाई में वर्ष 2015 में खाद्यान्न की क्वालिटी में गिरावट आई थी। सिकंदरा स्थित गोदाम में पानी भर गया जिससे दर्जनों गेहूं के पैकेट खराब हो चुके थे। अनाज बड़ी मात्रा में सड़ा और लोग भूखे पेट सो गए।

गोदामों के हाल

आरएफसी के दो बड़े गोदाम हैं। इनमें एक रुनकता में दूसरा शाहदरा नुनिहाई में हैं। इसके अलावा एफसीआई (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) का खाद्यान्न गोदाम आगरा कैंट में है। वहीं, छह तहसीलों में जिनमें सदर, फतेहाबाद, एत्मादपुर, किरावली, बाह, खेरागढ़ में अलग- अलग गोदाम बने हुए हैं।

इस दिन हुई थी खाद्य दिवस की घोषणा

दुनिया में भूखे सोने वाले लोगों की स्थिति को सुधारने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने विश्व खाद्य दिवस की घोषणा की थी। 16 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में वर्ल्ड फूड डे की शुरुआत हुई। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया में भुखमरी खत्म करना है।

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Updated on:
16 Oct 2017 04:15 pm
Published on:
16 Oct 2017 04:12 pm
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