
राजेश भटनागर
अहमदाबाद. 12 जून 2025 के विमान हादसे में पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के निधन को एक वर्ष पूरा हो गया है। पत्रिका से विशेष बातचीत में उनके पुत्र ऋषभ रूपाणी ने पिता की यादों, उनकी विरासत और परिवार के इस कठिन दौर पर खुलकर बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :
सवाल : विमान हादसे को एक वर्ष बीत चुका है। इस कठिन दौर को परिवार ने कैसे पार किया?
जवाब : सबसे पहले मैं सभी दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। पिता को खोना कोई छोटी बात नहीं होती। पिता एक ऐसे वृक्ष की तरह होते हैं, जो हमें धूप से बचाते हैं। जब वह वृक्ष नहीं रहता तो व्यक्ति स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है। लेकिन हमने महसूस किया कि पिताजी के विचार, आदर्श और संस्कार आज भी बादलों की तरह हमें जीवन की कठिन धूप से बचा रहे हैं। उन्हीं की प्रेरणा से हम हिम्मत के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
सवाल: पिता की कमी कितनी खलती है?
जवाब: समय तेजी से गुजर जाता है, लेकिन पिता की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। पिता का स्थान जीवन में भगवान के समान होता है। उनके जाने का खालीपन हमेशा रहता है। हम उनकी यादों और विचारों को सकारात्मक दिशा देकर अच्छे कार्यों के माध्यम से उन्हें जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।
सवाल : पिता की कौन-सी यादें आज भी सबसे ज्यादा साथ रहती हैं?
जवाब: उनकी हर छोटी-बड़ी बात याद आती है। हमारे घर में सुबह साथ बैठकर चाय-नाश्ता करने और बातचीत करने की परंपरा थी। पिताजी 16 घंटे का इंटरमिटेंट फास्टिंग करते थे, लेकिन परिवार के साथ बैठने का समय जरूर निकालते थे। परिवार के साथ समय बिताना उन्हें बहुत प्रिय था।
सवाल : क्या आज भी ऐसा महसूस होता है कि पिताजी आपके साथ हैं?
जवाब: बिल्कुल। उनके विचार, संस्कार और व्यवहार आज भी हमारे साथ हैं। वे हर व्यक्ति से आत्मीयता और सम्मान के साथ मिलते थे। परिवार को जोड़े रखना और सभी के सुख-दु:ख में साथ खड़ा रहना उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी। हम भी उसी मार्ग पर चलने का प्रयास कर रहे हैं।
सवाल : हादसे की जांच को लेकर परिवार का क्या नजरिया है?
जवाब: हमें सरकार, डीजीसीए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है। जांच जारी है और निष्कर्ष आने के बाद सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
सवाल: गुजरात विजय रूपाणी को किस रूप में याद रखेगा?
जवाब: वे संगठन के व्यक्ति थे। उनकी सबसे बड़ी विरासत संगठन और कार्यकर्ता हैं। वे व्यक्ति-पूजा में विश्वास नहीं रखते थे। आज भी कार्यकर्ताओं का जो स्नेह हमें मिलता है, वही उनकी लोकप्रियता और जीवन मूल्यों का सबसे बड़ा प्रमाण है।