
Ahmedabad. 12 जून की दोपहर करीब डेढ़ बजे का समय होगा। मैं सिविल अस्पताल 1200 बेड के पास कॉर्नर पर 108 एंबुलेंस के पार्किंग स्थल पर खाना खाने को टिफिन खोल ही रहा था कि अचानक धमाके की आवाज आई। बाहर निकलकर देखा तो धुएं का गुबार उठ रहा था। गंभीर हादसा होने की आशंका से टिफिन छोड़ा। दौड़ते हुए अतुल्यम हॉस्टल की ओर पहुंचा। वहां आग की लपटें उठ रही थीं। लोग दौड़ रहे थे। धुएं का गुबार था।
ऐसे में एक सिक्युरिटी गार्ड झुलती अवस्था में बाहर आया। उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल भेजा। कुछ देर में एक व्यक्ति हॉस्टल के पास घूम रहा था। वह भी झुलसा था और अंदर आग की दिशा में जाने की कोशिश कर रहा था। कह रहा था कि मेरा परिवार अंदर जल रहा है, उसे बचाने जाना है। उसे पकड़कर एंबुलेंस में बिठाया और सिविल हॉस्पिटल भेजा। बाद में पता चला कि वह विमान हादसे में एक मात्र जिंदा बचा यात्री विश्वास था।
ये शब्द हैं, सबसे पहले 108 एंबुलेंस के साथ पहुंचने वाले क्षेत्र के सुपरवाइजर सतिंदर सिंह संधू के, जिन्होंने विश्वास को समय से अस्पताल पहुंचाया। वे बताते हैं कि आज भी जब वे अतुल्यम हॉस्टल परिसर के पास वाले रोड से होकर गुजरते हैं, तो उनके सामने विमान हादसे का दर्दनाक मंजर घूम जाता है। उन्हें 108 से जुड़े हुए करीब 11 साल हो गए हैं, लेकिन इतना बड़ा और दर्दनाक हादसा ना उन्होंने कभी नहीं देखा था। घायलों से ज्यादा तो लोगों के जले हुए शव घटनास्थल पर थे। कईयों के तो अंग इधर, उधर थे। घायलों को पहुंचाने के बाद शवों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
अहमदाबाद. 108 एंबुलेंस के अहमदाबाद क्षेत्र के प्रभारी जितेंद्र साही बताते हैं कि 12 जून 2025 की घटना अहमदाबाद की अब तक की सबसे भयावह और बड़ी घटना थी। इस घटना की खबर पाते ही वे और शहर के 70 से ज्यादा 108 कर्मचारी, एंबुलेंस व जरूरी साधनों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे थे। घटनास्थल पर जिन कर्मचारियों को कुछ दिनों तक तैनात किया था, उनमें से कुछ को काउंसिलिंग दिलानी पड़ी। उन्हें काफी दिनों तक खाना-पीना अच्छा नहीं लग रहा था। उन्हें उचित काउंसिलिंग दी गई। साही बताते हैं कि अमूमन घायलों को एंबुलेंस अस्पताल पहुंचाती है, लेकिन यह हादसा इतना बड़ा था कि हमने घायलों के साथ शवों को भी अस्पताल पहुंचाया। इतना ही नहीं राजस्थान, मध्यप्रदेश व अन्य राज्यों में भी शवों को पुलिस व अन्य लोगों के साथ पहुंचाया। एक महीने पहले भारत-पाकिस्तान युद्ध के हालात के चलते मॉकड्रिल की तैयारी भी इससे निपटने में काफी मददगार रही।