
वडोदरा। गुजरात के वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। 19वें और अंतिम राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल ने कांग्रेस के भिखा रबारी को 30,499 वोटों के अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली। मांजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था, जिसमें 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। रविवार (3 अगस्त) को 19 राउंड में हुई मतगणना के दौरान भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और अंत में 30,499 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की।
जीत के बाद सतीश पटेल ने कहा कि मांजलपुर की जनता ने जिस तरह योगेश काका पर भरोसा जताया था, उसी तरह उन्हें भी भरपूर समर्थन दिया। उन्होंने इस जीत का श्रेय क्षेत्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखा रबारी ने अपनी हार स्वीकार करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाया गया, इसलिए यह चुनाव निष्पक्ष नहीं रहा। मांजलपुर विधानसभा सीट के नतीजे को भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस जीत के साथ पार्टी ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।
बता दें कि यह सीट बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के कारण खाली हुई थी। 260 मतदान केंद्रों पर हुए इस उपचुनाव में कुल 37.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 60.15 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें योगेश पटेल को 1,20,133 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया था। आपको बता दें कि मांजलपुर की राजनीति में दिवंगत भाजपा नेता योगेश पटेल का खास प्रभाव रहा है। गुजरात की राजनीति में उनका नाम उन नेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने कई वर्षों तक अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार बनाए रखा। अपने राजनीतिक सफर में वह कुल आठ बार विधानसभा पहुंचे।
योगेश पटेल ने अपने करियर की शुरुआत वडोदरा की रावपुरा विधानसभा सीट से जीत हासिल कर की थी। परिसीमन के बाद उन्होंने मांजलपुर सीट को अपना राजनीतिक क्षेत्र बनाया और वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज कर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। 2 जून को लंबी बीमारी के कारण उनका निधन हो गया, जिसके बाद मांजलपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई। इसी वजह से यहां उपचुनाव कराया गया। भाजपा ने इस चुनाव में सतीश गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनाव मैदान में उतारा।