
वडोदरा. मानसून के दौरान सड़कों के रखरखाव में सुधार के कदम के रूप में वडोदरा के मार्ग व मकान विभाग ने इस मौसम में पहली बार गड्ढे भरने के लिए 'इकोफिक्स' तकनीक का उपयोग किया।
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) व केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआइ) द्वारा विकसित 'इकोफिक्स' एक उन्नत कोल्ड-मिक्स तकनीक है। इसमें ग्रिट, बिटुमेन, स्टील स्लैग और अन्य विशेष रूप से तैयार सामग्री शामिल है। सभी प्रतिकूल मौसम में काम करने के लिए तैयार यह उत्पाद पानी भरे रास्तों पर भी त्वरित और स्थायी मरम्मत संभव बनाता है, और मरम्मत के तुरंत बाद यातायात शुरू किया जा सकता है।
इस तकनीक का उपयोग करते हुए वडोदरा के मार्ग व मकान विभाग ने वडोदरा के कायावरोहण से तरसाली चौकड़ी तक 20 किलोमीटर के क्षेत्र में गड्ढे भरे। वडोदरा के मार्ग व मकान विभाग के उच्च अधिकारियों ने बताया कि इकोफिक्स तकनीक अपनाने से सड़क मरम्मत की स्थिरता बढ़ेगी, रखरखाव का समय कम होगा। साथ ही मानसून के वर्तमान मौसम में वाहन चालकों के लिए सुरक्षित व सुगम रास्ते उपलब्ध होंगे।
यह पहल इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए हरित और तकनीक-आधारित समाधान अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कार्बन फुटप्रिंट कम करने में भी सहायता करता है और भारत को अपने 'नेट-जीरो कार्बन फुटप्रिंट' लक्ष्य प्राप्त करने में सहायक बनता है।
इसके तहत त्वरित और स्थायी सड़क रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया पर्यावरण-अनुकूल और सभी मौसमों में उपयोग होने वाली गड्ढा मरम्मत की सामग्री का उपयोग किया है। इसे पानी भरे गड्ढों में भी उपयोग किया जा सकता है। यह मजबूती, रटिंग के प्रति प्रतिरोध और उच्च स्थिरता प्रदान करता है।
इस सामग्री का उपयोग करने से पहले किसी टेक कोट या मिश्रण की आवश्यकता नहीं होती है। गड्ढे को साफ करके कूड़ा हटाने के बाद इकोफिक्स को सतह से थोड़ा ऊपर रखते हैं, इसे अच्छी तरह से दबाने के बाद रास्ता तुरंत यातायात के लिए तैयार हो जाता है। इस सामग्री को छह माह तक संग्रहीत कर उपयोग किया जा सकता है।