
अहमदाबाद।शहर सत्र अदालत ने राजद्रोह प्रकरण में आरोपी पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को राहत नहीं मिली है। शहर सत्र अदालत ने हार्दिक की आरोप मुक्ति (डिस्चार्ज) याचिका खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिलीप पी. महीडा ने अभियोजन पक्ष की दलील को मान्य रखते हुए कहा कि हार्दिक के खिलाफ सबूत हैं, जिसके आधार पर आरोप तय किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी के खिलाफ भाषण, बातचीत के रूप में सबूत तथा फोरेन्सिक सबूत यह स्थापित करता है कि हार्दिक व अन्य आरोपियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र रचा और सरकार को मांगें स्वीकारने के लिए दवाब बनाया और धमकी भी दी। अदालत ने पहले आरोपी रहे और अब गवाह बने केतन पटेल के बयान को भी सबूत के रूप में लिया। साथ ही यह बताया कि इस प्रकरण में आरोपी व अन्य के खिलाफ राजद्रोह, आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला बनता है। इस मामले में गत महीने सत्र अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
हार्दिक ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 227 के तहत आरोप मुक्त किए जाने की याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। आरक्षण आंदोलन के दौरान आरोपी ने किसी तरह का उकसाने या आपत्तिजनक व देशविरोधी बयान नहीं दिया, जिससे कि उसके खिलाफ राजद्रोह का मामला दायर हो। राज्य सरकार ने उसके खिलाफ गलत केस दर्ज किया है।
उधर, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि इस प्रकरण में हार्दिक के खिलाफ काफी सबूत हैं जिससे आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जा सकते हैं। अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में हार्दिक के भाषण के बाद से राज्यभर में हिंसा भडक़ी थी। इस कारण राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हुई थी। कफ्र्यू भी लगाना पड़ा था।
यह था मामला
25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान पर पाटीदार क्रांति रैली का आयोजन किया था। इस रैली के खत्म होने के बाद देर शाम अहमदाबाद के साथ-साथ राज्य भर में हिंसा भडक़ी थी। इस हिंसा में 13 जनों की मौत हो गई थी। इस घटना के करीब दो महीने बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इस मामले में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक हार्दिक व अन्य के खिलाफ राजद्रोह व आपराधिक षड्यंत्र के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
अब आरोप तय की प्रक्रिया
इस प्रकरण में हार्दिक सहित सभी अन्य आरोपी जमानत पर हैं। हार्दिक को गुजरात उच्च न्यायालय ने जून 2016 में जमानत दी थी। अब हार्दिक, दिनेश बांभणिया और चिराग पटेल के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे। गत वर्ष जनवरी में क्राइम ब्रांच ने हार्दिक व अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। विधानसभा चुनाव से पहले चिराग व दिनेश ने हार्दिक से किनारा कर लिया था। चिराग भाजपा से जुड़ गए हैं।