
वडोदरा। नेपाल यात्रा से वडोदरा लौटी दो महिला यात्रियों ने वहां की परिस्थिति बयां की। यात्री परिता शुक्ला ने बताया कि नेपाली गाइड यात्रियों को परिवार की तरह संभालते हैं। भाषा की बाधा के समय मध्यस्थ बनकर सहायता करते हैं। भूस्खलन के दौरान यात्रियों को कीचड़ में न चलना पड़े, इसके लिए उन्होंने बस की व्यवस्था कर सभी को सुरक्षित रवाना किया था।
नेपाल के रास्ते खराब थे। मार्ग पर लगातार भूस्खलन हो रहा था और बारिश के कारण रास्ते कीचड़ से भरे थे। भूस्खलन की घटनाएं इतनी अधिक थीं कि आवागमन लगातार बाधित हो रहा था। नेपाल से वडोदरा लौटी सुधा गोस्वामी ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि तेज बहती नदी और पहाड़ से गिरते पत्थरों के बीच कीचड़ से गुजरकर जान बचानी पड़ी। चलते समय करीब डेढ़ फुट बड़ा पत्थर उनके पैर को छूकर निकला, जिससे वे बाल-बाल बचीं।
अहमदाबाद की उड़ान में बैठने के बाद पता चला कि वे जिस पुल से निकली थीं, वह टूट गया था और बाढ़ आ गई थी। बाढ़ के भयावह दृश्य और मददगार स्थानीय लोगों की याद उनके जेहन में जिंदा है। नेपाल यात्रा में उन्हें अच्छे दर्शन हुए। वापसी में भी उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि यात्रा के बाद उन्हें एक दुखद समाचार मिला। उनकी मदद करने वाले गाइड की इस आपदा में मौत हो गई।
नेपाल में भारी बाढ़ में वडोदरा से जुड़ी न्यूजीलैंड की नागरिक किन्नरी और मिहिर पटेल भी लापता हो गए हैं। दोनों ही कैलास मानसरोवर की यात्रा पर गए थे। वडोदरा में रहने वाले किन्नरी पटेल के भाई चिराग पटेल ने बताया कि पटेल दंपत्ति ने मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से अपनी यात्रा की सीधी बुकिंग की थी। उन्होंने सरकार से इस मामले में सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि दोनों काठमांडु में थे तब बात हुई थी। उसके बाद से संपर्क नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इन दोनों के साथ 60 से ज्यादा लोग थे। बाकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं हैं।