अहमदाबाद

इस पूर्व सीएम की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के खिलाफ टिप्पणी, भाजपा ने की निंदा

-मेहता ने स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को बताया था गैरकानूनीो
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इस पूर्व सीएम की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के खिलाफ टिप्पणी, भाजपा ने की निंदा

अहमदाबाद. भाजपा ने सरदार पटेल की प्रतिमा-स्टेच्यू ऑफ यूनिटी- को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता की गई टिप्पणी की निंदा की है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता भरत पंड्या ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता के सरदार की प्रतिमा को गैरकानूनी बताए जाने से राज्य की जनता को आघात लगा है। उन्होंने कहा कि मेहता के बयान से कई अर्थ निकाले जा सकते हैं। इसमें स्टेच्यू ऑफ यूनिटी नहीं बननी चाहिए। मेहता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व से ईष्र्या से पीडि़त हैं और वे किसी मंच के मार्फत विवाद पैदा कर भोले समाज में जहर फैलाना चाह रहे हैं। साथ ही वे गुजरात विरोधी लोगों के एजेन्डा का माध्यम बन रहे हैं।
पंड्या के मुताबिक मेहता का स्टेच्यू ऑफ यूनिटी से आदिवासियों का व्यापार-रोजगार खत्म की आशंका पूरी तरह गलत है। पर्यटन के विकास से रोजगार पैदा होता है। उन्होंने कहा कि मेहता ने अपना मानसिक संतुलन भुलाकर सरदार पटेल की प्रतिभा-प्रतिमा का विरोध कर उनकी देश की एकता, गुजरात का गौरव, गुजरात के नेतृत्व व गुजरात की अस्मिता का अपमान किया है।

वर्ष 1995-96 में सुरेश मेहता गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे। शंकरसिंह वाघेला के भाजपा में विद्रोह के बाद उन्हें भाजपा की ओर से सीएम बनाया गया था। हालांकि वे एक वर्ष से कम समय तक इस पद पर रहे। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
वे 1995 में भाजपा की केशूभाई पटेल की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 1998 में जब भाजपा फिर से सत्ता में लौटी, तब भी वे केशूभाई की सरकार में उद्योग मंत्री बने थे। 2001 में कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप के कारण केशूभाई को मुख्यमंत्री पद छोडऩा पड़ा था और नरेन्द्र मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि मेहता मोदी के नेतृत्व का विरोध करते हुए भी 2002 तक मंत्री बने हुए थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिसम्बर 2007 में भाजपा छोड़ी।

Updated on:
22 Oct 2018 03:24 pm
Published on:
22 Oct 2018 03:24 pm