
गांधीनगर। गुजरात में 3.76 करोड़ रुपए की डिजिटल अरेस्ट ठगी की रकम इधर-उधर करने वाले साइबर गिरोह के तीन सदस्यों को गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के बैंक खातों से 13 राज्यों में दर्ज 29 साइबर अपराध की शिकायतें जुड़ी मिली हैं और इन खातों में करीब 83.11 लाख रुपए का लेनदेन सामने आया है। आरोपियों की पहचान राजस्थान के अजमेर जिले के गोपाल राम, नेकदीन कठात और हरियाणा के जींद निवासी दीपक के रूप में हुई है। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मैदानी जांच के बाद राजस्थान और चंडीगढ़ से आरोपियों को पकड़ा। मामला सीआइडी साइबर क्राइम सेल थाने में दर्ज एफआइआर की जांच के दौरान सामने आया।
पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी साइबर ठगी से मिली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाने का काम करते थे और इसके बदले कमीशन लेते थे। चंडीगढ़ से पकड़े गए आरोपी के मोबाइल में यूएसडीटी के लेनदेन से जुड़े एप मिले। वह रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बदले उसे नकद रकम मिलने की बात सामने आई है। राजस्थान से पकड़े गए दोनों आरोपियों ने एक साझेदारी फर्म के नाम से बैंक खाता खुलवाया था।
इस खाते में डिजिटल अरेस्ट ठगी से मिली करीब 70 लाख रुपए की रकम जमा की गई। इसके बाद रकम को दूसरे खातों में भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की तो सात बैंक खातों की जानकारी मिली। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर जांच में इन खातों से जुड़े 29 से अधिक मामलों का पता चला। इन मामलों में करीब 83.11 लाख रुपए के लेनदेन की शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक इन खातों से जुड़ी शिकायतें गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और ओडिशा में दर्ज हैं। इनमें कर्नाटक की सात, तमिलनाडु की तीन, पश्चिम बंगाल की तीन, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की दो-दो तथा अन्य राज्यों की शिकायतें शामिल हैं।
जांच में गिरोह के ठगी के तरीके का भी पता चला है। पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य ऑनलाइन लोन तलाशने वाले लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें एनईओ फाइनेंस नाम की कंपनी से लोन दिलाने का झांसा देकर जरूरी दस्तावेज लिए जाते थे। इसके बाद कथित तौर पर पीड़ितों से प्लेस्टोर से पुशबुलेट एप डाउनलोड कराया जाता था। उन्हें आइडी और पासवर्ड देकर एप सक्रिय कराया जाता था। पुलिस का कहना है कि इसी प्रक्रिया के जरिए आरोपियों को पीड़ितों के मोबाइल तक पहुंच मिल जाती थी और उनके बैंक खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट ठगी की रकम लेने के लिए किया जाता था।
ठगी की रकम को बाद में कई बैंक खातों में बड़ी संख्या में लेनदेन के जरिए भेजा जाता था। इस तरह गिरोह उन लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था, जो खुद ऑनलाइन लोन लेने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें इस पूरे खेल की जानकारी नहीं होती थी। जांच में सामने आए बैंक खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, निवेश, यूपीआइ और ट्रेडिंग से जुड़ी साइबर ठगी में भी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मामले में गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश जारी है।