अहमदाबाद

मोरबी में मच्छु जल त्रासदी की 47वीं बरसी पर मौन रैली, दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि, 11 अगस्त 1979 की भयावह त्रासदी को याद कर भावुक हुए मोरबीवासी

च्छु जल त्रासदी की 47वीं बरसी के अवसर पर मनपा कार्यालय से मौन रैली रवाना हुई। इसमें श्रम राज्यमंत्री कांतिभाई अमृतिया, पूर्व श्रम राज्यमंत्री बृजेश मेरजा, महापौर उत्तम सुराणी, जिला कलक्टर स्वप्निल खरे, एसपी मुकेश पटेल, डीडीओ विद्यासागर सहित अधिकारी, पदाधिकारी, नागरिक और स्कूली बच्चे शामिल हुए।
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Silent rally marks 47th anniversary of Morbi's Machchhu dam tragedy; tributes paid to the deceased
दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि

मोरबी. 11 अगस्त 1979 को मोरबीवासी कभी नहीं भूल सकते। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद मोरबी की जीवनरेखा माने जाने वाला मच्छु-2 बांध दोपहर में टूट गया था। तड़के 3.15 बजे पानी के तेज बहाव ने मोरबी शहर में भारी तबाही मचा दी थी। जल त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में हर वर्ष की तरह इस साल भी मंगलवार को पारंपरिक मौन रैली निकाली गई।
मच्छु जल त्रासदी की 47वीं बरसी के अवसर पर मनपा कार्यालय से मौन रैली रवाना हुई। इसमें श्रम राज्यमंत्री कांतिभाई अमृतिया, पूर्व श्रम राज्यमंत्री बृजेश मेरजा, महापौर उत्तम सुराणी, जिला कलक्टर स्वप्निल खरे, एसपी मुकेश पटेल, डीडीओ विद्यासागर सहित अधिकारी, पदाधिकारी, नागरिक और स्कूली बच्चे शामिल हुए।
मौन रैली शहर के गांधी चौक, नगर दरवाजा, परा बाजार सहित विभिन्न मार्गों से होते हुए मणि मंदिर स्मारक पहुंची। यहां जल त्रासदी में दिवंगत लोगों की स्मृति में बनाए गए इस स्मारक पर सभी ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।

4,200 लोगों ने गंवाई थी जान

उस भयावह दिन को याद करते हुए राज्यमंत्री कांतिभाई अमृतिया ने कहा कि जल त्रासदी में 4,200 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने बताया कि त्रासदी के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री करीब एक महीने तक मोरबी में रुके थे और यहीं से सरकार का संचालन किया था। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में करीब तीन महीने तक मोरबी में रहे थे और राहत कार्यों में जुटे थे। स्वयं अमृतिया ने भी उस दौरान राहत कार्यों में हिस्सा लिया था।

पुत्र को खोने वाले पिता की आंखें हुई नम

जल त्रासदी में पुत्र को खोने वाले पी.एम. नगवाड़िया ने उस दिन को याद करते हुए कहा कि आज भी उस दिन की यादें भावुक कर देती हैं। उन्होंने बताया कि उस दिन पानी के तेज बहाव में उनका 14 साल का पुत्र जान गंवा बैठा था। उस समय पुत्र 9वीं कक्षा में पढ़ता था। उन्होंने कहा कि उनके एक मित्र के परिवार के ही 11 सदस्यों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि लोग अपने दैनिक काम के लिए उठे ही थे कि अचानक पानी का तेज बहाव शहर में पहुंच गया। गली के मुहाने पर पानी आने की जानकारी मिलने के बाद वे दुकान के शेड पर चढ़ गए थे। उस भयावह घटना को याद करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं।
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कैप्शन - मोरबी में जल त्रासदी में दिवंगत लोगों की स्मृति में बनाए गए मणि मंदिर स्मारक पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देते हुए।

Updated on:
11 Aug 2026 09:20 pm
Published on:
11 Aug 2026 09:20 pm