
Ahmedabad. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने गुजरात यूनिवर्सिटी (जीयू) को श्रेणीबद्ध-2 (ग्रेडेड) स्वायत्तता प्रदान की है। जीयू राज्य की पहली स्टेट यूनिवर्सिटी बन गई है, जिसे यह दर्जा प्राप्त हुआ है। अब यूनिवर्सिटी को नए कोर्स, विभाग, स्कूल और विशेष केंद्र शुरू करने के लिए यूजीसी की पूर्व मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप नए शैक्षणिक कार्यक्रम तेजी से शुरू किए जा सकेंगे।
यूजीसी ने गत 6 जुलाई को आयोजित 598वीं बैठक में जीयू को श्रेणी-2 विश्वविद्यालय स्तर की स्वायत्तता प्रदान करने का निर्णय किया। यूजीसी के फरवरी 2018 में अधिसूचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विश्वविद्यालयों (केवल) का श्रेणीबद्ध (ग्रेडेड) स्वायत्तता प्रदान करने के लिए श्रेणीकरण विनिमय के तहत यह निर्णय किया है।
विदेशी प्रोफेसरों और विद्यार्थियों के लिए रास्ता आसान
जीयू के कार्यकारी कुलपति प्रो.जगदीश जोशी के अनुसार स्वायत्तता के तहत जीयू भारत सरकार के नियमों के अनुसार, स्वीकृत शिक्षकों की संख्या से 20 प्रतिशत तक विदेशी शिक्षकों की करार आधारित या तय समय के लिए नियुक्ति भी पूर्व मंजूरी लिए कर सकेगी। अपनी आय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी विकसित कर सकेगी। स्वीकृत छात्र संख्या से 20 फीसदी तक विदेशी विद्यार्थियों को प्रवेश देने, उनके लिए फीस तय करने का अधिकार भी यूनिवर्सिटी को मिलेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्ववित्तीय आय बढ़ने की संभावना है।
नई स्वायत्तता के बाद जीयू यूजीसी के नियमों के तहत ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) के माध्यम से भी अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार कर सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर श्रेणी-1 विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों से बाह्य मूल्यांकन (पीयर रिव्यू) भी करा सकेगी। इससे बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीयकरण से जुड़ी पहलें तेजी से लागू होंगी।
प्रो. जोशी ने बताया कि स्वायत्तता के बाद जीयू स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप नए डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, स्नातक, स्नातकोत्तर कोर्स, स्किल आधारित और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगी। इससे उद्योगों की जरूरत के मुताबिक शिक्षा, व्यावसायिक कौशल और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
यह जीयू के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, सुशासन, संस्थागत विकास, अंतरराष्ट्रीयकरण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए काफी अहम है।- प्रो.जगदीश जोशी, जीयू के कार्यकारी कुलपति