813 Urs Ajmer Dargah: जुलूस के दरगाह गेस्ट हाउस से शुरू होकर लंगरखाना गली व निजाम गेट होते हुए बुलंद दरवाजा तक पहुंचने के दौरान सूफीयाना कलाम पेश करेंगे व 25 तोपों की सलामी होगी।
Ajmer News: सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813 वें उर्स का झंडा शनिवार शाम दरगाह के बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया जाएगा। भीलवाड़ा का गौरी परिवार यह रस्म अदा करेगा। उर्स विधिवत रूप से रजब का चांद दिखाई देने पर शुरू होगा।
परम्परानुसार ढोल-ताशे के बीच दरगाह गेस्ट हाउस से झंडे का जुलूस निकाला जाएगा। शाही कव्वाल कलाम पेश करते चलेंगे। उर्स का झंडा विभिन्न मार्गों से होकर निजाम गेट, शाहजहांनी गेट होते हुए बुलंद दरवाजे तक पहुंचेगा। गरीब नवाज की दरगाह के बुलंद दरवाजे पर भीलवाड़ा के लाल मोहम्मद गौरी के पोते फखरूद्दीन और उनके परिवार के लोग झंडा चढ़ाने की रस्म अदा करेंगे। झंड़ा चढ़ाने की रस्म के साथ उर्स की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी।
जुलूस के दरगाह गेस्ट हाउस से शुरू होकर लंगरखाना गली व निजाम गेट होते हुए बुलंद दरवाजा तक पहुंचने के दौरान सूफीयाना कलाम पेश करेंगे व 25 तोपों की सलामी होगी। इस साल उर्स में 1.50 से 2.50 लाख जायरीन के शामिल होने की उम्मीद की जा रही है।
उर्स का झंडा अजमेर में ही तैयार किया जाता है। पुष्कर रोड अद्वैत आश्रम स्थित ओमप्रकाश वर्मा और उनके पुत्र सुभाषचंद्र का परिवार 70 साल से झंडा तैयार कर रहे हैं। पहले ओमप्रकाश के पिता गणपतलाल फलोदिया झंडे की सिलाई करते थे।
75 फीट ऊंचा है बुलंद दरवाजा
14-15वीं शताब्दी में खिलजी वंश ने कराया था निर्माण
500 साल पुराना है बुलंद दरवाजा