पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि मोहनीदेवी व भागचन्द रावत के रिश्ते 10 साल से ठीक नहीं थे। भागचन्द शराब के नशे में आए दिन उससे मारपीट करता, शक के चलते उसे प्रताड़ित करता।
अजमेर। मोहनीदेवी की कहानी सिर्फ मर्डर केस नहीं, बल्कि उस स्त्री की जिंदगी की त्रासदी है, जिसने रिश्ते बचाने की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। पति की मारपीट, शराब, शक और अपराधों के बावजूद मोहनीदेवी ने न तो घर छोड़ा, न रिश्ता तोड़ा लेकिन जिस पति के लिए उसने अपने बच्चों तक से नाता तोड़ लिया, वही उसका सबसे बड़ा डर व मौत का कारण बन गया।
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि मोहनीदेवी व भागचन्द रावत के रिश्ते 10 साल से ठीक नहीं थे। भागचन्द शराब के नशे में आए दिन उससे मारपीट करता, शक के चलते उसे प्रताड़ित करता, लेकिन मोहनीदेवी सब कुछ चुपचाप सहती रही। रिश्तेदार, बेटों के समझाने के बावजूद वह पति का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हुई।
जानकारी अनुसार करीब दो साल पहले भागचन्द ने नशे में दुकान में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। दुकान का सारा सामान जलकर राख हो गया। बेटे विजय सिंह रावत ने आदर्श नगर थाने में मामला दर्ज कराया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने भागचन्द को गिरफ्तार किया। बेटे, पत्नी, दुकानदार ने उसके खिलाफ बयान दिए।
कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। लेकिन पति के जेल जाते ही मोहनीदेवी का मन पिघल गया। उसने भागचन्द को रिहा करा लिया। इस फैसले के बाद परिवार बिखर गया। बेटा विजय मां से नाराज होकर अलग रहने लगा, जबकि मोहनीदेवी ने पति के लिए बेटों और बेटियों तक से नाता तोड़ लिया।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि भागचंद की आपराधिक प्रवृत्ति बचपन से रही। चौदह साल की उम्र में उस पर चाचा की हत्या का आरोप लगा। नाबालिग होने व पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण वह छूट गया, लेकिन हिंसक स्वभाव कभी नहीं बदला। परिवार और गांव में उसके झगड़े आम बात थे। खास बात यह है कि गुरूवार को वारदात के बाद भागचन्द अपने रिश्तेदारों को कॉल कर बाकी सदस्यों को भी निपटाने की धमकी देता रहा।
छोटे बेटे अजय सिंह के अनुसार, बीते दो महीनों से पिता मां को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। बीमारी में खर्च किए पुराने पैसों का ब्याज जोड़कर 22 लाख रुपए की मांग करता और मारपीट करता था। दिसम्बर के अंत में झगड़े के बाद भागचन्द घर छोड़कर चला गया और धमकियां देने लगा। अजय का आरोप है कि मां आत्महत्या नहीं कर सकती थी। घर के बाहर लगे ताले इस बात की गवाही देते हैं कि वारदात के बाद बाहर से ताला लगाया गया।