अजमेर

video…अजमेर दरगाह की चादर रंगून में बहादूर शाह जफर के मजार पर पेश

ajmer dargah news : आखिरी मुगल शासक बहादुर शाह जफर के म्यामार में यंगून (रंगून) स्थित मज़ार पर अजमेर दरगाह से भेजी गई विशेष राजस्थानी बंधेज की चादर पेश की गई। यंगून में भारतीय राजदूत सौरभ कुमार ने यह चादर पेश की। उन्होंने अपने ट्वीटर एकाउंट पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की है।
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Updated: 24 Nov 2019, 8:25 PM IST
video...अजमेर दरगाह की चादर रंगून में बहादूर शाह जफर के मजार पर पेश
video...अजमेर दरगाह की चादर रंगून में बहादूर शाह जफर के मजार पर पेश

अजमेर. आखिरी मुगल शासक बहादुर शाह जफर (bahadur shah zafar) के म्यामार में यंगून (रंगून) स्थित मज़ार पर अजमेर दरगाह (ajmer dargah) से भेजी गई विशेष राजस्थानी बंधेज की चादर (chadar) पेश की गई। यंगून में भारतीय राजदूत सौरभ कुमार ने यह चादर पेश की। उन्होंने अपने ट्वीटर एकाउंट पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की है। उन्होंने लिखा है कि बहादुर शाह जफर के 157वें उर्स के अवसर पर अजमेर में तैयार की गई विशेष चादर को पेश किया गया। उन्होंने इसे यंगून और भारतीय संस्कृति का संगम बताया।

अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह में प्रबंध संभालने वाली दरगाह कमेटी ने इस चादर को तैयार करवाया। इसकी विशेषता यह है कि इस पर राजस्थानी कला बंधेज का कार्य किया गया है। चादर को 15 नवम्बर को जिला कलक्टर विश्व मोहन शर्मा व अन्य अधिकारियों ने भारतीय दूतावास के लिए रवाना किया था।

यह है चादर की विशेषता

अजमेर में तैयार की गई इस चादर का कुल वजन 2 किला 600 ग्राम है। नांरगी और नीले रंग के बनारसी सिल्क के कपड़ें पर राजस्थानी बंधेज का कार्य किया गया है। चादर 6 फीट चौड़ी, 8 फीट लम्बी और 18 इंच ऊंची है। चादर के बीच के हिस्से में उभार के लिए जहां सतह पर फोम का प्रयोग किया गया है, वहीं बीच बीच में सुन्दर मोतियों से सजाया गया है। कौनो व बीच में गोटे का कार्य किया गया है। सुन्दरता के लिए बीच बीच में सफेद फूलों से भी इसे सजाया गया हैं। चादर को लौंगिया निवासी मोहम्मद लियाक़त अली ने तैयार किया।

पिछले साल राष्ट्रपति ने पेश की थी चादर

पिछले साल भी रंगून के लिए चादर अजमेर में ही तैयार की गई थी, तब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद खुद रंगून गए थे, उन्होंने यहां की चादर को मुगल शासक बहादूर शाह जफर के मजार पर पेश की थी। हाल ही भारतीय दूतावास का रंगून दौरा हुआ, तब पिछले साल भेजी गई चादर को याद किया गया और वहां की उर्स कमेटी ने इस बार भी अजमेर से ही चादर मंगवाए जाने की इच्छा व्यक्त की।

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