अजमेर

Ajmer Dargah Dispute : कोर्ट में पेश किया मुगल सम्राट शाहजहां की पुत्री का दस्तावेज, 2 मई को होगी सुनवाई

Ajmer Dargah Dispute : अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर मामले की सुनवाई अब 2 मई होगी। कोर्ट में मुगल सम्राट शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम का लिखित दस्तावेज पेश कर सुनवाई का आग्रह किया है।

2 min read
अजमेर में हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता। फोटो पत्रिका

Ajmer Dargah Dispute : अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में प्राचीन संकटमोचन महादेव मंदिर के दावे के मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने मुगल सम्राट शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम का लिखित दस्तावेज पेश कर सुनवाई का आग्रह किया है। उधर मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी।

याचिकाकर्ता हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता संदीप कुमार ने न्यायालय के समक्ष दरगाह परिसर में प्राचीन हिंदू स्मारक और शिवालय होने के प्रमाण के रूप में आदेश 7, नियम 14 के तहत साक्ष्य पेश किया है। इसमें बताया गया है कि शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम द्वारा 17वीं शताब्दी में मुनीस-उल-अरवाह लिखा गया था। इसमें महादेव के निवास स्थान (शिवालय) पर अधिपत्य, कच्ची कब्र और बाद में एक संगमरमर का संदूक रखने का जिक्र किया गया है।

ये भी पढ़ें

RAS-2024 Topper : आरएएस-2024 टॉपर दिनेश विश्नोई ने बताए सफलता के मंत्र, जानें उनकी सक्सेस स्टोरी

हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश की पालना में सभी आवेदकों को पक्षकार बनाए जाने को लेकर प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के लिए न्यायाधीश मनमोहन चंदेल की अदालत में 2 मई को सुनवाई होगी। इसमें महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह ने भी वादी बनाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया है।

अजमेर दरगाह विवाद - क्या है मामला?

यह मामला वर्ष 2024 से चल रहा है। नवंबर 2024 में विष्णु गुप्ता की याचिका स्वीकार होने के बाद जनवरी 2026 में महाराणा प्रताप सेना की याचिका भी अदालत ने स्वीकार कर ली थी। दोनों याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए रखा गया है।

याचिकाकर्ता रिटायर्ड जज हरबिलास सारदा की 1911 की किताब ‘Ajmer: Historical and Descriptive’ समेत अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला दे रहे हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर हिंदू संगठन प्राचीन मंदिर की बहाली और पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दरगाह कमेटी इसे धार्मिक स्थल की अखंडता से जोड़कर देख रही है।

क्या है वर्शिप एक्ट, 1991?

जानकारी के अनुसार 1991 में बना यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि 15 अगस्त 1947 के बाद से किसी भी धार्मिक स्थल का स्वरूप नहीं बदला जाएगा। हिंदू सेना का दावा है कि यह कानून दरगाह पर लागू नहीं होता क्योंकि यह कोई पूजा स्थल नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक दरगाह है। अब देखना है कि कोर्ट इस पर क्या फैसला लेती है।

ये भी पढ़ें

Railway Updates : जयपुर से होकर कोलकाता के लिए वीकली स्पेशल ट्रेन आज से चलेगी, वंदे भारत सहित कई ट्रेनों का बदला मार्ग
Published on:
19 Apr 2026 02:19 pm
Also Read
View All