अजमेर

Ajmer Mayor Election Live: वोटिंग के लिए कांग्रेस पार्षदों के आते ही दोबारा हंगामा, पुलिस के साथ की बहस

Ajmer Mayor Election: अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए वोटिंग शुरू हो चुकी है। कांग्रेस की किरण गढ़वाल और भाजपा की अनामिका शर्मा के बीच मुकाबला है।
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Sep 21, 2026
ajmer mayor chunav
अजमेर मेयर पद की वोटिंग के दौरान दूसरा हंगामा

अजमेर. शहर को नया मेयर आज सोमवार को मिलेगा। नगर निगम के निर्वाचित 80 पार्षद मतदान करेंगे। वहीं, भाजपा और कांग्रेस में अंदरूनी सेंधमारी का खतरा बना हुआ है। 41 का जादुई आंकड़ा ही भावी मेयर तय करेगा। महापौर पद के लिए मतदान शुरू हो चुका है और दोपहर 2 बजे तक होगा और आज ही मतगणना के बाद परिणाम जारी होगा। महापौर पद के लिए दोनों पार्टियों के प्रत्याशी वोट दे चुके हैं।

बता दें कि भाजपा ने वार्ड 3 की पार्षद अनामिका शर्मा और कांग्रेस ने वार्ड 57 की पार्षद किरण गढ़वाल को महापौर प्रत्याशी घोषित किया है। रिटर्निंग अधिकारी अनिल पूनिया दोनों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर चुके हैं।

एक बार फिर हंगामा

मेयर पद के लिए जारी चुनाव के बीच एक बार फिर हंगामा देखने को मिला। दरअसल, कांग्रेस के पार्षद बस से नगर निगम पहुंचे थे। लेकिन पुलिसकर्मियों ने बस को चेक करने के लिए रोक लिया था। उसी दौरान हंगामा हुआ। बैरिकेड पर बस रोके जाने के कारण कांग्रेस के नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। मामला बढ़ता देख वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उसके बाद बस को निगम परिसर में जाने की अनुमति मिली।

वोटिंग से पहले भी गरमा गया था माहौल

अजमेर में मेयर चुनाव की वोटिंग शुरू होने से पहले ही निगम परिसर के बाहर माहौल गरमा गया। कांग्रेस के पूर्व देहात अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, मेयर पद की प्रत्याशी किरण गढ़वाल के साथ निगम पहुंचे थे। इसी दौरान बैरिकेड पर मौजूद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निगम परिसर में प्रवेश को लेकर विरोध जताया। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि भूपेंद्र सिंह को अंदर जाने की अनुमति कैसे दी गई। मामला बढ़ता देख पुलिस ने बीच-बचाव किया और भूपेंद्र सिंह को निगम परिसर से बाहर कर दिया।

BJP के लिए 36 साल पुराना गढ़ बचाना है चुनौती

अजमेर नगर निगम में मेयर चुनाव ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 और भाजपा ने 32 सीटें जीती हैं, जबकि 11 निर्दलीय और बागी पार्षद किसी भी दल को बहुमत से दूर रखने वाले आंकड़े हैं। ऐसे में मेयर की कुर्सी के साथ बोर्ड बनाने की चाबी भी इन्हीं पार्षदों के पास है। भाजपा अपना 36 साल पुराना दबदबा कायम रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस इस बार नए समीकरण की उम्मीद लगाए है। इतने सालों में पहली बार कांग्रेस के ज्यादा पार्षद जीते हैं।