अजमेर

PM मोदी ने राजस्थान दौरे पर किया ‘इज़राइल’ का ज़िक्र, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच इशारों ही इशारों में दे दिया ये संदेश !

मिडिल ईस्ट में ईरान और इज़राइल के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव और अमेरिका के साथ मिलकर किए गए 'सर्जिकल स्ट्राइक्स' के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अजमेर दौरा और वहां दिया गया संबोधन वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। जहाँ पूरी दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान की मिट्टी से मेजर दलपत सिंह और हाइफा विजय का जिक्र कर इज़राइल के साथ भारत के सदियों पुराने और 'रक्त' से सींचे गए रिश्तों को एक नई धार दे दी है।
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Updated: 1 Mar 2026, 11:46 AM IST
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अजमेर। जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान पर हो रहे अमरीकी-इज़राइली हमलों (US-Israel Strikes) और खाड़ी देशों में उड़ते मिसाइलों पर टिकी हैं, ठीक इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर की धरा से एक ऐसी ऐतिहासिक कड़ी को जोड़ा, जिसने इज़राइल और राजस्थान के अटूट रिश्तों को फिर से ताजा कर दिया है।

दरअसल, शनिवार को अजमेर की 'कायड़ विश्राम स्थली' पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वे अभी हाल ही में इज़राइल की यात्रा पूरी कर लौटे हैं और वहां आज भी राजस्थान के सपूतों की वीरता के किस्से घर-घर में सुनाए जाते हैं।

इज़राइल में राजस्थान का 'गौरव'

पीएम मोदी ने बताया कि अपनी इज़राइल यात्रा के दौरान उन्हें वहां की संसद (नेसेट) में मेजर दलपत सिंह के शौर्य को नमन करने का सौभाग्य मिला।

"राजस्थान के वीरों ने इज़राइल के हाइफा शहर को आजाद कराने में जो भूमिका निभाई, उसे इज़राइल के लोग आज भी गौरव से याद करते हैं। यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि हमारे दिलों का रिश्ता है।" - नरेंद्र मोदी (अजमेर रैली)

मिडिल ईस्ट संकट और मोदी का टाइमिंग

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है।

ईरान पर हमला: इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के मारे जाने की खबरें भी आ रही हैं।

रणनीतिक संदेश: इस तनाव के बीच राजस्थान आकर इज़राइल के साथ सैन्य गौरव का जिक्र करना यह दर्शाता है कि भारत और इज़राइल के रिश्ते केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बलिदानों पर आधारित हैं। यह संदेश सीधे तौर पर दुनिया को भारत की मजबूत कूटनीति का अहसास कराता है।

'हाइफा के नायक' मेजर दलपत सिंह का ज़िक्र

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मेजर दलपत सिंह शेखावत का जिक्र किया।

कौन थे मेजर दलपत सिंह? जोधपुर के पाली (देवली) के मूल निवासी मेजर दलपत सिंह शेखावत प्रथम विश्व युद्ध (1918) के दौरान जोधपुर लांसर्स के कमांडर थे।

हाइफा की जंग (Battle of Haifa): 23 सितंबर 1918 को मेजर दलपत सिंह के नेतृत्व में राजस्थान के वीर बांकुरों (जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर्स) ने केवल तलवारों और भालों के दम पर ऑटोमन साम्राज्य की तोपों और मशीनगनों को धूल चटा दी थी।

ऐतिहासिक विजय: इसी युद्ध के कारण इज़राइल का प्रमुख शहर 'हाइफा' आजाद हुआ था। मेजर दलपत सिंह इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए, जिसके बाद उन्हें 'हाइफा का नायक' (Hero of Haifa) कहा गया। इज़राइल के स्कूलों में आज भी उनकी बहादुरी का पाठ पढ़ाया जाता है।

मेजर दलपत सिंह: वीरता के प्रमुख बिंदु

जन्म: 26 जनवरी 1892, जोधपुर रियासत

पद: मेजर, जोधपुर लांसर्स (15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवेलरी ब्रिगेड)

सम्मान: मरणोपरांत ब्रिटिश सरकार द्वारा 'मिलिट्री क्रॉस' (MC) से सम्मानित

दिल्ली का 'तीन मूर्ति चौक': दिल्ली का प्रसिद्ध 'तीन मूर्ति चौक' असल में जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद के उन वीरों की याद में बना है जिन्होंने हाइफा की जंग जीती थी। मोदी सरकार ने हाल ही में इसका नाम बदलकर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' किया है।

अजमेर: आस्था और शौर्य का संगम

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि राजस्थान के सपूतों ने केवल देश की सीमाओं की रक्षा नहीं की, बल्कि सात समंदर पार भी मानवता और आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हैं।

Updated on:
1 Mar 2026, 11:46 AM IST
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