
जयपुर/अजमेर: राजस्थान पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक भ्रामक वीडियो का खंडन किया है। पुलिस के अनुसार, इस वीडियो को गलत संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अजमेर जनसभा से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा है ताकि आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सके। पुलिस ने साफ किया है कि "सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर वीडियो सच नहीं होता" और तथ्यों की जांच किए बिना किसी भी पोस्ट को शेयर करना कानूनी मुश्किल में डाल सकता है।
सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद राजस्थान पुलिस ने अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट साझा की। पुलिस ने स्पष्ट संदेश देते हुए लिखा:
राजस्थान पुलिस ने चेतावनी दी है कि डिजिटल युग में केवल अफवाह फैलाना ही नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ाना (Share/Like) भी अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रधानमंत्री की 28 फरवरी की रैली को लेकर अजमेर में पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। लगभग 5000 पुलिसकर्मियों और SPG की तैनाती के बीच, शरारती तत्व डिजिटल माध्यम से माहौल बिगाड़ने की फिराक में थे। पुलिस ने इस 'फेक वीडियो' को समय रहते पहचान कर बड़े विवाद को टल दिया है।
पुलिस विभाग ने प्रदेशवासियों को जागरूक करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं:
बड़ी रैलियों और वीवीआईपी दौरों के दौरान अक्सर पुराने या दूसरे राज्यों के वीडियो को राजस्थान के संदर्भ में वायरल किया जाता है। राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की शांति भंग करने की ऐसी किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Updated on:
01 Mar 2026 10:02 am
Published on:
01 Mar 2026 10:02 am
