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Holi 2026 Date Conflict: 2, 3 या 4 मार्च…कब है होलिका दहन, कब है धुलंडी और कब है चंद्रग्रहण…ज्योतिषियों ने किया महासंशय दूर

Holi 2026 Date & Time: राजस्थान में होली की तारीखों को लेकर बड़ा अपडेट! जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, धुलंडी की सही तिथि और चंद्रग्रहण के सूतक काल का पूरा गणित।

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Holi 2026

Holi 2026 (सोर्स- एक्स)

Holi 2026 Date Conflict: राजस्थान में होली की तिथियों को लेकर चल रहा संशय अब पूरी तरह दूर हो गया है। ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है कि होलिका दहन 2 और 3 मार्च की दरमियानी रात शास्त्र सम्मत मुहूर्त में होगा, जबकि 3 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। चंद्रग्रहण के कारण लोगों में उत्पन्न भ्रम पर विद्वानों ने साफ कहा है कि धुलंडी पर ग्रहण का कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार ने 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलंडी का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित समय और नियमों का पालन करने की अपील की है।

क्या है ज्योतिषियों का मत


ज्योतिष दिग्दर्शन केंद्र के पंडित दामोदर शास्त्री के अनुसार होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त 2 मार्च की रात 1 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट के बीच रहेगा। वहीं धुलंडी 3 मार्च को ही खेली जाएगी। उन्होंने बताया कि ग्रहण के दौरान सूतक का प्रावधान तब विशेष रूप से लागू होता है जब ग्रहण आरंभ हो जाए। धुलंडी सूर्यास्त से पहले मनाई जाएगी, इसलिए यह वर्जित नहीं है। हालांकि मंदिरों में पूजा-पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सूतक काल में वर्जित रहेंगे।

ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने भी स्पष्ट किया कि होली की तारीखों को लेकर कोई भ्रम नहीं है। दहन 2 मार्च की देर रात को निर्धारित मुहूर्त में होगा और धुलंडी 3 मार्च को ही खेली जाएगी। जयपुर में शाम छह बजे के बाद लगभग 18 मिनट का चंद्रग्रहण रहेगा, जिसमें शास्त्र अनुसार नियमों का पालन आवश्यक होगा।

शास्त्र सम्मत तिथि और ग्रहण का समय

राजस्थान ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के महासचिव प्रो. विनोद शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होकर 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। चूंकि 3 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं रहेगी, इसलिए 2 मार्च को ही होलिका दहन शास्त्र सम्मत है। 2 मार्च की रात भद्रा का प्रभाव रहेगा। भद्रा के मुख में दहन वर्जित होता है, लेकिन पुच्छ में दहन शुभ माना गया है। इस आधार पर अर्धरात्रि बाद 1.26 से 2.38 बजे का समय सर्वोत्तम रहेगा। 3 मार्च को सुबह 6.55 बजे से सूतक आरंभ होगा, जबकि ग्रहण काल दोपहर 3.21 से शाम 6.47 बजे तक रहेगा। जयपुर में यह शाम छह बजे बाद दिखेगा।