जब राजनीति में 'पद' और 'कद' की बहस छिड़ती है, तो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम अक्सर शीर्ष पर आता है। शनिवार को अजमेर की 'कायड़ विश्राम स्थली' पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि सत्ता के समीकरण भले ही बदल गए हों, लेकिन जनता के दिलों और प्रधानमंत्री के सम्मान में राजे का रुतबा आज भी अडिग है।
अजमेर। राजस्थान की राजनीति में शनिवार का दिन केवल विकास परियोजनाओं के नाम नहीं रहा, बल्कि यह 'सियासी केमिस्ट्री' का भी गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मंच पर आए, तो सबकी निगाहें इस बात पर थीं कि वे राजस्थान के वर्तमान और पूर्व नेतृत्व के साथ कैसे पेश आते हैं। लेकिन जैसे ही मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत की और 'बहन वसुंधरा जी' शब्द पुकारा, अजमेर के पांडाल में मौजूद भीड़ ने तालियों और नारों से आसमान गुंजा दिया।
मंच पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी और भाजपा के कई दिग्गज मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने शिष्टाचार के नाते सभी का नाम लिया, लेकिन जो उत्साह और शोर वसुंधरा राजे के नाम पर सुना गया, वह इस रैली का सबसे बड़ा 'हाइलाइट' बन गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह शोर केवल एक नाम के लिए नहीं, बल्कि राजे की राजस्थान में गहरी पैठ और लोकप्रियता का परिचायक था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वसुंधरा राजे को 'बहन' कहकर संबोधित किया। इस संबोधन पर राजे के चेहरे की मुस्कान और उनकी सौम्य प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
अजमेर रैली का शेड्यूल काफी व्यस्त था। तय कार्यक्रम के अनुसार:
जैसे ही पीएम मोदी और वसुंधरा राजे का यह वीडियो इंटरनेट पर आया, #VasundharaRaje और #ModiInAjmer ट्रेंड करने लगा। समर्थकों ने "पद बदलते हैं, कद नहीं" के कैप्शन के साथ वीडियो को जमकर शेयर किया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि राजे आज भी राजस्थान भाजपा की सबसे बड़ी 'क्राउड पुलर' हैं।
प्रधानमंत्री का अजमेर से राजे को इतना सम्मान देना राजस्थान की भावी राजनीति के लिए कई संकेत देता है: