अजमेर

Big crisis: चाहिए जेबखर्ची तो करना पड़ेगा ये काम, वरना नहीं मिलेगी फूट कौड़ी

www.patrika.com/rajasthan-news
2 min read
Nov 04, 2018
budget curtail of mdsu
budget curtail of mdsu

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के हाल खराब हैं। सरकार ने पिछले सत्र में विश्वविद्यालय का 4 करोड़ रुपए का अनुदान (ग्रांट) रोक दिया। इस बार भी ग्रांट रुकने का खतरा मंडराया है। वित्त विभाग ने चेताया है कि शैक्षिक-अशैक्षिक वर्ग से रिकवरी के सात करोड़ रुपए वसूली के बगैर विश्वविद्यालय को अनुदान नहीं मिलेगा।

1 अगस्त 1987 को स्थापित विश्वविद्यालय को राज्य सरकार से 4 करोड़ रुपए का अनुदान मिलता है। यह राशि शैक्षिक सहित गैर शैक्षिक अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में इस्तेमाल होती है। हालांकि स्टाफ के लिहाज से अनुदान ऊंट के मुंह जीरा है। विश्वविद्यालय को वेतन-भत्तों के भुगतान के लिए करीब 5 से 7 करोड़ रुपए की आवश्यकता पड़ती है। सरकारी अनुदान के अलावा विश्वविद्यालय बकाया राशि का भुगतान अपनी बचत राशि से करता है।

क्यों नहीं हुई वसूली?

वित्त वर्ष 2017-18 की बजट फाइनेंस कमेटी की बैठक हुई। इसके आधार पर सरकार ने 11 जनवरी, 21 और 23 मार्च, 27 मार्च 2018 को पत्र भेजा। वित्त विभाग ने विश्वविद्यालय से स्थानीय अंकेक्षक दल की तरफ से निकाली गई 7 करोड़ रुपए की रिकवरी वसूली के बारे में पूछा। विभाग ने साफ कहा कि शैक्षिक और गैर शैक्षिक वर्ग से वसूली किए बगैर अनुदान नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय ने कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया तो सरकार ने अनुदान रोक दिया।

इस बार भी हालात यथावत

वित्तीय वर्ष 2018-19 के हालात भी कमोबेश वैसे हैं। वित्त विभाग ने चार करोड़ रुपए जारी नहीं करने का फैसला लिया। विभाग इस बार भी 7 करोड़ रुपए की रिकवरी वसूली के बगैर अनुदान जारी करने के पक्ष में नहीं है। ऐसा तब है, जबकि इस साल विश्वविद्यालय में चार कुलपति तैनात रहे हैं। स्थानीय अंकेक्षक दल की ऑडिट और रिकवरी वसूली को लेकर कोई नीतिगत फैसला नहीं हुआ है। हालांकि विश्वविद्यालय का वित्त विभाग जल्द कोई निर्णय लेने के मूड में है। हाल में वित्त विभाग ने विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक को जयपुर बुलाकर बातचीत भी की थी।

वरना स्थिति खराब...

विश्वविद्यालय के लिए सरकारी अनुदान बहुत कम है। परीक्षा शुल्क के रूप में प्रतिवर्ष 12 से 15 करोड़ रुपए की आय ही प्रमुख स्त्रोत है। इसके अलावा पिछले बीस साल में करीब दस बार प्री.बीएड परीक्षा, पीएमटी, बीएसटीसी, पीसीपीएमटी परीक्षा कराने पर विश्वविद्यालय को करीब 50 से 70 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। इससे मिलने वाली ब्याज राशि से शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और सेवानिवत्त कार्मिकों की पैंशन का भुगतान होता है।

Published on:
04 Nov 2018 08:15 pm