अजमेर

Biggest Issue: नौजवानों को फायदे कम, योजनाएं कागजों में गुम

ना सरकार ना उच्च शिक्षा विभाग ने योजनाओं को दोबारा खंगाला ना उन्हें नियमित चलाने की व्यवस्था की है।

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Jan 19, 2022
govt welfare schemes for students

अजमेर. युवाओं के रोजगार और शैक्षिक कल्याण की योजनाएं महज कागजी और प्रायोगिक साबित हो रही हैं। पिछले दस साल में कई योजनाएं बनीं, लेकिन युवाओं के फायदे मिलने से पहले गुम हो गईं। ना सरकार ना उच्च शिक्षा विभाग ने योजनाओं को दोबारा खंगाला ना उन्हें नियमित चलाने की व्यवस्था की है।
पिछले एक दशक में उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज में अध्ययनरत युवाओं के रोजगार, शैक्षिक उन्नयन और कॅरियर को लेकर कई योजनाएं बनाई। जोर-शोर से इन्हें राज्य के महाविद्यालयों में लागू किया गया। लेकिन योजनाएं सत्ता परिवर्तन के साथ दम तोड़ती चली गई।

योजनाएं और उनके हाल...
1-2017 में एसएफएस योजनान्तर्गत ईवनिंग क्लासेज प्रारंभ करना तय हुआ। दस हजार रुपए फीस देखकर विद्यार्थियों ने दाखिले नहीं लिए
2-2016 में इग्नू के सहयोग से उद्यमिता एवं कौशल विकास पाठ्यक्रमों गिने-चुने विद्यार्थियों ने प्रवेश लिए। कई पाठ्यक्रम चल नहीं पाए
3-2012 में एक निजी बैंक से एमओयू कर सभी कॉलेज में ट्रेनिंग-प्लेसमेंट केंद्र कागजों में ही सिमट गए।
4-2016-17 में 75 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति पर परीक्षा में 5 अतिरिक्त अंक का फायदा नहीं मिला।
5-2011-12 में सभी कॉलेज में मिलिट्री साइंस पाठ्यक्रम की शुरुआत नहीं हो पाई।
6-2017-18 में रक्तदान करने पर 5 अतिरिक्त उपस्थिति का युवाओं को नहीं मिला फायदा
7-2013 में कैट और लघु सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम कुछ अर्सा चलकर छह साल से बंद।
8-2007-08 में इंग्लिश स्पोकन लैब और जेनपेक्ट सेंटर 12 साल से बंद
9-2008-09 में कॉलेज में हाइटेक कम्प्यूटर लेब और फैसेलिटी सेंटर कुछ समय हुए बंद

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फैक्ट फाइल
राज्य में सरकारी कॉलेज-328
निजी कॉलेज-1852
राज्य में अध्ययनरत विद्यार्थी-25 लाख
अध्ययनरत छात्र-13.50 लाख
अध्ययनरत छात्राएं-11.50 लाख

उच्च शिक्षा विभाग नियमित रूप से योजनाएं चलाता हैं। एक दशक में वैश्विक मंदी, कोरोना संक्रमण जैसी कई चुनौतियां भी आई हैं। सरकार से ज्यादा योजनाओं का संचालन अहम होता है। समयानुकूल योजनाओं में नवाचार-बदलाव किए जाते तो यह युवाओं के लिए फायदेमंद साबित होंती।
डॉ. एम.एल. अग्रवाल, पूर्व प्राचार्य एसपीसी-जीसीए
राज्य में सत्ता के साथ योजनाएं बदलती हैं। विद्यार्थियों को विशेष फायदा नहीं मिलता। भारी फीस रखने से युवा रुचि नहीं लेते। शिक्षक भी नि:शुल्क पढ़ाने को तैयार नहीं होते हैं।
अब्दुल फरहान, एएसयूआई जिलाध्यक्ष

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Published on:
19 Jan 2022 07:31 am
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