
ब्यावर (अजमेर).
अमृतकौर चिकित्सालय में पिछले तीन माह में श्वान काटने से 278 पीडि़त अस्पताल पहुंचे। जनवरी से मार्च तक गर्मी के तेवर तीखे नहीं थे। सर्दी का असर मार्च के दूसरे पखवाड़े तक था। इसके बावजूद हर दिन औसत तीन से अधिक पीडि़त डॉग बाइट के पहुंचे। तापमान अभी से चालीस के पास पहुंच रहा है।
ऐसे में वैशाख व जेठ माह में गर्मी के तेवर और तीखे होंगे। ऐसे में इस माह में डॉग बाइट के मामले और बढ़ सकते हैं। इसके चलते अस्पताल प्रशासन ने अभी से दवा का स्टॉक मंगवाकर रख लिया है।
अमृतकौर चिकित्सालय में चार जिलों के मरीज आते हैं। इसी कारण यहां पर दवा की खपत भी अधिक होती है। एक साल में यहां श्वान के काटने पर लगने वाला एंटी रैबीज वैक्सीन (इंटर डरमल) की मांग भी अधिक रहती है।
जनवरी माह में श्वान काटने से पहुंचे पीडि़तों की संख्या 74 थी, जो सर्दी के तेवर कम होने व गर्मी का असर बढऩे के साथ ही संख्या बढऩे लगी। फरवरी माह में इसकी संख्या बढ़कर 89 तक पहुंच गई, जबकि मार्च माह में इसकी संख्या 115 हो गई। ऐसे में वैशाख व जेठ में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
गर्मी में बढ़ता है आंकड़ा
अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि श्वानों को गुस्सा गर्मी बढऩे से आता है। वहीं बरसात में जमीन में रहने वाली जीव पानी भरने से बाहर आ जाते है। इसी कारण खेतों में काम करने वाले काश्तकार सर्पदंश से अचेत हो जाते है। यही दो समय होते हैं जब श्वान व सर्पदंश के मामले अस्पताल में सबसे अधिक आते हैं।
समय पर पानी नहीं मिल पाने के कारण भी जानवर हाइपर हो जाते है। इस दौरान श्वान काटने के मामले अन्य माह के अलावा तेजी से बढ़ते है।
डॉग बाइट : मरीज एक नजर
माह मरीजों की संख्या
जनवरी 74
फरवरी 89
मार्च 115
डॉग बाइट के मरीजों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम है। गर्मी बढऩे के साथ ही इन रोगियों की संख्या में इजाफा होगा।
- डॉ. एम. के. जैन, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, एकेएच ब्यावर