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अरमानों पर पानी न फेर दे आसमानी आफत

बूंदाबांदी और ओलों ने बढ़ाई काश्तकारों की परेशानी, अभी भी खेतों में ही पड़ी है कटाई के बाद फसल
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अरमानों पर पानी न फेर दे आसमानी आफत

मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर).

अजमेर जिले में गत दिनों बदले मौसम ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। उनकी परेशानी यह है कि कहीं आसमान से बारिश और ओलों के रूप में बरस रही आफत उनके अरमानों पर पानी न फेर दे। क्योंकि अभी भी कई खेतों में फसल कटाई हो रही है तो कई में फसल को कटाई के बाद जमा किया गया है। वहीं पंचायत समिति क्षेत्र में इन दिनों गेहूं की कटाई जोरों पर चल रही है, लेकिन मौसम परिवर्तन ने काश्तकारों की नींद उड़ा दी। यह तो गनीमत रही कि गत दिनों बूंदाबांदी ही होकर ही रह गई, अन्यथा गेहूं की फसल को भारी नुकसान हो सकता था।


नगर सहित आस-पास क्षेत्रों के खेतों में इन दिनों गेहूं की फसल की कटाई जारी है। काश्तकार कटाई में जुटे हैं। पंचायत समिति क्षेत्र में करीब 3200 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। कृषि विभाग के अनुसार अभी तक 75 प्रतिशत से अधिक की कटाई हो चुकी है। खेतों में जगह-जगह गेहूं के पुळे बंधे पड़े हैं। उन पर धूप लगाई जा रही है, इसके बाद गेहूं निकाला जाएगा।

ऐसे में रविवार शाम को अचानक मौसम परिवर्तन के कारण तेज अंधड़ और बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ। हालांकि पंचायत समिति क्षेत्र में बूंदाबांदी होकर ही रह गई। तेज बारिश होने की स्थिति में खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचता। बारिश के कारण गेहूं के दाने निकलकर बिखर जाते। हालांकि अभी भी खेतों में 25 प्रतिशत के करीब फसलों की कटाई शेष है। मौसम परिवर्तन के कारण काश्तकारों ने कटाई और खेतों में पड़ी फसल से गेहूं निकालने का काम तेज कर दिया है। चना और सरसों की कटाई का काम पूरा हो चुका है।