अजमेर

इंजीनियर्स नहीं करना चाहते यह कोर्स, पढि़ए आखिर क्यों बनाई इतनी दूरी

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Oct 21, 2018
Engineering students MBA degree
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रक्तिम तिवारी/अजमेर।

इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रबंधन शिक्षा फेल होने लगी है। एमबीए कोर्स में विद्यार्थियों की दाखिलों की रुचि लगातार कम हो रही। प्रबंधन की डिग्री के बावजूद रोजगार नहीं मिलना इसकी बड़ी वजह है। यही वजह है कि अब कॉलेज में सीट खाली रहने लगी हैं।

अजमेर के महिला एवं बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट कोर्स संचालित है। बॉयज कॉलेज में प्रबंधन की 120 सीट हैं। पहले इनमें राजस्थान मैनेजमेंट एप्टीट्यूटड टेस्ट (आरमेट) के जरिए प्रवेश होते थे। तब तक मैनेजमेंट कोर्स में प्रवेश की स्थिति ठीक रही। केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा सीमेट को प्रवेश का आधार बनाने के बाद हालात बदल गए हैं। जहां महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश शून्य है। वहीं बॉयज कॉलेज में 15-20 सीट भी नहीं भरी हैं।

ये हैं प्रवेश के हाल
बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में संचालित एमबीए कोर्स में प्रवेश ग्राफ गिरने लगा है। पिछले पांच साल में इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रति सत्र 10 से 15 विद्यार्थियों ने दाखिले लिए हैं। जबकि कॉलेज में प्रबंधन विभाग में करीब छह शिक्षक हैं। इनमें रीडर और लेक्चरर शामिल हैं। महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में तो कोर्स बंद हो चुका है।

नहीं है युवाओं का रुझान

साल 2004-05 तक एमबीए में युवाओं की काफी रुचि थी। नामचीन आईआईएम और निजी मैनेजमेंट संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेज में एमबीए की सभी सीट भर जाती थी। लेकिन पिछले 10-12 साल में विद्यार्थियों और युवाओं की रुचि घट रही है। वैश्विक मंदी, अच्छे पैकेज नहीं मिलने, कम्पनियों-संस्थानों को मनमाफिक दक्ष युवा नहीं मिलना भी इसकी प्रमुख वजह है। खासतौर पर इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थी तकनीकी डिग्री को ज्यादा तवज्जो देने लगे हैं।

बंद कर चुके कोर्स

कुछ हद तक एमबीएस कोर्स निजी विश्वविद्यालय-कॉलेज में ही संचालित है। हालांकि सावित्री कन्या महाविद्यालय, श्रमजीवी सहित कई कॉलेज एमबीए कोर्स बंद कर चुके हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में भी अब दाखिले मुश्किल से होते हैं।

Published on:
21 Oct 2018 03:27 pm