Sabji Mandi Bhav: ज्यादातर सब्जियां अपने पुराने दामों के मुकाबले आधे से भी कम कीमत पर बिक रही हैं। इससे आमजन को राहत मिली है लेकिन किसानों और आढ़तियों के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट में बदलती जा रही है।
Sabji Mandi Bhav: अजमेर/मदनगंज-किशनगढ़। शहर की प्रमुख सब्जी मंडी में इन दिनों सब्जियों के भावों में गिरावट है। पिछले एक से डेढ़ महीने में सब्जियों की रिकॉर्ड आवक ने बाजार का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ज्यादातर सब्जियां अपने पुराने दामों के मुकाबले आधे से भी कम कीमत पर बिक रही हैं। इससे जहां आमजन को बड़ी राहत मिली है, वहीं किसानों और आढ़तियों के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट में बदलती जा रही है।
मंडी में टमाटर, मिर्ची, लौकी, ग्वार फली, भिंडी, बैंगन जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के भाव काफी टूट गए हैं। टमाटर जो कुछ समय पहले 20 रुपए किलो था, अब मात्र 8 रुपए किलो बिक रहा है। ग्वारफली 40 रुपए से गिरकर 5-10 रुपए, मिर्ची 30 से 10-15 रुपए और लौकी 20 से घटकर 8-10 रुपए किलो पहुंच गई है।
शिमला मिर्च 35 से घटकर 16-18 रुपए, तुरई 35 से 10-15 रुपए और बैंगन 35 से 10-20 रुपए किलो बिक रहे हैं। हरी सब्जियों में पालक 12 से घटकर 5-8 रुपए, धनिया 30 से 15-20 रुपए और पुदीना 30 से घटकर 20 रुपए पर आ गया है।
केवल सब्जियां ही नहीं, बल्कि गर्मियों के फलों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। खरबूजा 25 से घटकर 15 रुपए और तरबूज 20 से गिरकर 12 रुपए किलो बिक रहा है। केरी (कच्चा आम) 45 से घटकर 20-22 रुपए और गुंदा 35 से गिरकर 5-15 रुपए तक आ गया है।
सब्जी उत्पादक किसानों का कहना है कि इतनी भारी गिरावट के कारण उन्हें अपनी उपज लागत से भी कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। खेत से मंडी तक लाने का किराया, मजदूरी और अन्य खर्च जोड़ने के बाद भी उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। कई किसान तो मजबूरी में सब्जियां सड़ने के लिए छोड़ने या बेहद सस्ते दाम पर बेचने को विवश हैं।
व्यापारियों ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन अधिक हुआ है। आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सब्जियां रोजाना मंडी में पहुंच रही हैं, जबकि मांग उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। इसी असंतुलन ने भावों को नीचे धकेल दिया है।
जहां अधिकतर सब्जियों के भाव गिरे हैं, वहीं पत्ता गोभी 10 से बढ़कर 15 रुपए किलो पहुंच गई है। फूलगोभी में हल्की गिरावट दर्ज हुई है, लेकिन यह अभी भी 30 रुपए किलो के आस-पास बनी हुई है।
मंडी से जुड़े व्यापारियों ने बताया कि यदि आवक का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में भाव और नीचे जा सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को तो और राहत मिलेगी, लेकिन किसानों के लिए यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
किशनगढ़ की सब्जी मंडी में इस समय दोहरी स्थिति बनी हुई है जहां एक तरफ आम आदमी सस्ती सब्जियों से खुश है, वहीं दूसरी तरफ किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य न मिलने से परेशान हैं। यह स्थिति बाजार में मांग और आपूर्ति के असंतुलन की स्पष्ट स्थिति बयां कर रही है।